जेबी, चैंबर ऑफ मेडिसिन, गीतांजली, शर्मा मेडिकल स्टोर के संचालक दवाईयों की वसूल रहे हैं मनमानी कीमत

0
664

डीएम और सीएमओ दे ध्यान
मेरठ, 25 मार्च (विशेष संवाददाता) 22 तारीख को व्यापारियों द्वारा जिलाधिकारी से दवा की दुकानें खोलने के संदर्भ में मुलाकात की गई फिर 23 तारीख को भी अफसरों को दुहाई दी गई कि उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं। जनहित में हमें सारी दुकाने एक साथ खोलने की अनुमति दी जाए। शायद प्रशासन की समझ में यह बात आ गई और जनहित में दवा विके्रताओं को अपने मेडिकल स्टोर खोलने की अनुमति दे दी। लेकिन मेडिकल स्टोर संचालक उपभोक्ताअेां का उत्पीड़न और दुव्यर्वहार कितने उच्च स्तर पर कर रहे थे इसका उदाहरण सबसे पहले तो बेगमपुल पर आपका बाजार स्थित चैंबर आॅफ मेडिसिन मेडिकल स्टोर में देखने को मिला। जब एक उपभोक्ता रिफ्रेश लिक्वीजैल नामक आंखों में डालने वाली दवाई मांगी तो 10 प्रतिशत की छूट जो आम समय में हर दुकानदार देता है वो देने की बजाय दुकानदार उपभोक्ता से दुव्यर्वहार पर उतर आया।
इसी प्रकार कैंट हाॅस्पिटल की दुकानों में स्थित गीतांजलि मेडिकल स्टोर में जो दवाई 170 रूपये की होनी चाहिए थी 10 प्रतिशत काटकर वो 196 रूपये की देने की कोशिश की गई। और सदर बांबे बाजार स्थित शर्मा मेडिकल स्टोर पर उक्त दवाई 170 की जगह 180 रूपये की पकड़ाई गई। दुकान खुलने का समय होता ही ग्राहकों की जो भीड़ इन पर जुटी उसे देखकर लगता था कि दवाई की कीमत से ज्यादा इस प्रकार से वसूली गई रकम का लाभ प्राप्त करने में दुकानदार चूकने को तैयार नहीं थे। भाजपा नेता तुषार गुप्ता ने बताया कि छिपीटेैंक स्थित जेवी मेडिकल स्टोर से लगभग एक हजार रूपये की दवाई ली।


पूर्व में दस प्रतिशत अपने आप इसके द्वारा छोड़ा जाता था। आज मांगने पर भ्ीा दुव्यर्वहार करने पर उतर आया। बताते चलें कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा जबसे जैनरेटिक दवाईयों की बिक्री शुरू कराई गई खैरनगर में दुकानदार अपने आप ही बीस प्रतिशत और गली मौहल्लों के मेडिकल स्टोर संचालक भी दस प्रतिशत की छूट अपने आप में कर देते हैं। लेकिन लाॅकडाउन का फायदा उठाते हुए 170 रूपये में जो दवाई मिलनी चाहिए वो 196 रूपये में बेची जा रही थी। लोगों का मौखिक रूप से यह भी कहना था कि सभी मेडिकल स्टोर वालों ने कोरोना के चलते सनेटाईजर व मास्क पांच से दस गुना किमतों तक में बेचा है।
सीएमओ सहित प्रशासन को जनहित में इन दवा विक्रेताओं की निरंकुशता को नियंत्रित कर उपभोक्ताओं को जो आर्थिक नुकसान इनके द्वारा दिया जा रहा है उस पर रोक लगानी चाहिए ऐसा कितने ही उपभोक्ताओं का कहना था। लेकिन मजबूरी में जो दाम यह बता रहे थे। उनका ही भुगतान करने के लिए उपभोक्ता परेशान दिखाई दिए। कुछ ग्राहकों का कहना था कि दवा की लिखी कीमत का बिल भी नहीं दिया जा रहा था। और शायद यही कारण है कि लोग 20 प्रतिशत छूट के लिए खैरनगर दवा बाजार भाग रहे थे और वहां भारी भीड़ नजर आई। लोगों का कहना था कि मेडिकल स्टोरों का लाइसेंस निरस्त होना चाहिए।

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

14 − 6 =