एमडीए बोर्ड बैठक में किसको लाभ पहुंचाने के लिए एग्रीमेंट पर संपत्ति का कब्जा देने का रखा जा रहा है प्रस्ताव

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आर्थिक परेशानियां उत्पन्न हो सकती है विकास प्राधिकरण में

छह दिसंबर को होने वाली मेरठ विकास प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में अब बिना रजिस्ट्री एग्रीमेंट पर आवंटियों को दिया जा सकता है कब्जा। जैसा निर्णय मेरी निगाह में आम आवंटी के हित में कम बड़े बिल्डरों और संपत्ति खरीददारों के लिए ज्यादा लाभदायक होगा। लेकिन एमडीए को इससे भारी आर्थिक नुकसान भी हो सकता है क्योंकि जब वर्तमान में बिना कब्जे मिले ही कितने आवंटी समय से किश्ते जमा नहीं कराते तो भला संपत्ति पर कब्जा मिल जाने के बाद तो यह और भी कठिन हो जाएगा। एक अखबार में छपी खबर के अनुसार मेरठ विकास प्राधिकरण आवंटियों को बड़ी राहत देने जा रहा है। अब एमडीए की संपत्ति लेने पर रजिस्ट्री कराने के बाद ही कब्जा मिलने की बाध्यता नहीं होगी। आवंटी एग्रीमेंट कराकर कब्जा ले सकेंगे। इसके लिए विशेष प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। माना जा रहा है कि अधिकांश बोर्ड सदस्य इससे सहमत हैं, जिससे इसका पास होना तय माना जा रहा है। एमडीए की शहरभर में विभिन्न काॅलोनियों में 45 हजार के करीब संपत्तियां हैं। अभी तक एमडीए की संपत्ति लेने के बाद उसका बैनामा कराया जाना जरूरी होता है। बैनामा कराने के बाद प्राधिकरण की ओर से ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी होता है। इसके बाद प्राधिकरण कब्जा देता है। अफसरों की मानें तो चारों जोन में करीब आठ से दस हजार ऐसी संपत्तियां हैं, जिनकी रजिस्ट्री नहीं हुई है। वहीं इनमें से अधिकांश ऐसे हैं, जो लगातार प्राधिकरण की किश्त जमा कर रहे हैं।

मेरा मानना है कि इसमें आम आदमी को फायदा कम और बड़े बिल्डर व संपत्ति खरीददारों को लाभ पहुंचाने के दृष्टिकोण से कुछ लोगों द्वारा शायद यह प्रस्ताव बनवाने में भूमिका निभाई गई है क्योंकि यह किसी से छुपा नहीं है कि एमडीए में किस प्रकार से फाइलें गायब होती हैं और पूर्व में तो बिना पैसा जमा कराए ही बैंक की मोहर लगाकर रसीदे संबंधित क्लर्कों से मिलकर जमा कराने के किस्से शायद सुनने को मिल चुके हैं। ऐसे में अगर बिना रजिस्ट्री के एग्रीमेंट पर कब्जा दिया जाने लगा तो विकास प्राधिकरण को आर्थिक नुकसान होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। पहले से ही आर्थिक परेशानियां झेल रहा तथा और कई कारणों से चर्चित प्राधिकरण के अधिकारियों के इस प्रस्ताव को अनुमति दिया जाना सरकार एमडीए के हित में नहीं है। क्योंकि अगर ऐसा होने लगा तो मिलीभगत से आवंटन की फाइलें गायब कराने का सिलसिला बढ़ सकता है। आखिर एमडीए बोर्ड बैठक में किसको लाभ पहुंचाने के लिए एग्रीमेंट पर संपत्ति का कब्जा देने का रखा जा रहा है प्रस्ताव।

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