कल्पना और रोमांच से भरा है पिशाच

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मेरठ 19 सितंबर (प्र)। अपराध कथा लेखन की परंपरा को संजीव पालीवाल अपने ही अंदाज में आगे बढ़ा रहे हैं। नैना के लेखक इस बार पिशाच लेकर आए हैं। शनिवार को निंबस बुक स्टोर पर संजीव ने अपने नए उपन्यास पिशाच का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि किसी लेखक की असली पहचान उसके पहले उपन्यास से नहीं, बल्कि दूसरे उपन्यास से होती है। पुरानी कहावत रही है कि एक उपन्यास भर की कहानी हर इंसान के पास होती है।

संजीव के पहले उपन्यास नैना की कहानी टेलीविजन समाचार की उनकी जानी-पहचानी दुनिया की थी, तो पिशाच की कहानी हमारे-आपके जीवन की है। महानगरीय मध्यवर्गीय जीवन के भय की है और सब कुछ इतना समकालीन है कि उपन्यास को पढ़ते हुए उसको घटित होता हुआ महसूस किया जा सकता है। संजीव का कहना है कि हिदी पाठकों की कोई कमी नहीं है, बल्कि हिदी साहित्य लिखने वाले न्याय नहीं कर पाए। यही वजह है कि हिदी साहित्य की कमी युवा पीढ़ी को अखर रही है। हालांकि अंग्रेजी पुस्तकों के हिदी अनुवाद ने हिदी साहित्य में कुछ जान जरूर फूंकी है, और युवा पीढ़ी इन पुस्तकों को काफी पसंद भी कर रही है।

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