Thursday, February 12

20 लाख वसूलने वाले दोनों दारोगा पर 25 हजार के इनाम की संस्तुति

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मेरठ 12 फरवरी (प्र)। व्यापारी से 20 लाख की वसूली करने वाले दोनों दारोगा लोकेंद्र साहू और महेश गंगवार पर एएसपी ने 25 हजार के इनाम की संस्तुति एसएसपी से की है। गैरहाजिर होने पर दोनों दारोगा की एक अतिरिक्त जांच भी बैठा दी गई है। साथ ही ई-साक्ष्य एप पर पीड़ित व्यापारी के बयान दर्ज किए। व्यापारी को साथ लेकर क्राइमसीन का निरीक्षण भी किया गया। विभागीय जांच के मामले में इंस्पेक्टर योगेश चंद ने सीओ आफिस को दर्ज कराए बयान में कहा कि उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीं थी। एएसपी अंतरिक्ष जैन का कहना है कि मुखबिर का नाम भी मुकदमे में बढ़ाया जाएगा।

लिसाड़ीगेट के मुहल्ला इस्लामाबाद में मोहम्मद राशिक की धागे की दुकान और कपड़े का कारखाना है। भाई रागिब कारखाने पर बैठता है। एक दिसंबर 2025 को दोनों भाइयों ने दुकान और कारखाने के बैंक खाते में डेढ़ करोड़ की लिमिट बनवाई थी। बैंक ने उनके खाते में डेढ़ करोड़ की रकम ट्रांसफर कर दी थी। मुखबिर चीनू ने लोहियानगर थाने के दारोगा लोकेंद्र साहू और महेश गंगवार को राशिक के पास डेढ़ करोड़ रुपये होने की सूचना दी। दोनों दारोगाओं ने नौ दिसंबर शाम चार बजे राशिक को घर से उठा लिया। कार में हापुड़ तक ले गए। धमकी दी गई कि दिल्ली ब्लास्ट में उसका नाम खुलवा दिया जाएगा। राशिक घबरा गया, उसने भाई रागिब और बहनोई नईम को हापुड़ रोड पर बुलाया। दोनों दारोगा ने राशिक को छोड़ने के लिए 50 लाख की मांग की। 20 लाख में सौदा तय हुआ। तीन किस्तों में दोनों दारोगा को रकम दे दी गई। रकम लेने के बाद दारोगाओं ने राशिक का एक वीडियो बनाया कि उसके साथ पुलिस ने कुछ नहीं किया और उसे छोड़ दिया। मुखबिर चीनू को भी दारोगाओं ने दो लाख रुपये दिए थे।
21 जनवरी को दारोगा लोकेंद्र ने नईम और राशिक को वाट्सएप काल की। तीन दिनों तक इन्होंने काल रिसीव नहीं की। तब उन्हें जेल भेजने की धमकी दी गई।
काल रिसीव करने पर चौथी बार पाँच लाख की रकम मांगी गई। तब व्यापारी ने 28 जनवरी को एसपी सिटी से शिकायत की। एसपी सिटी की जांच में सभी आरोप सही पाए गए पांच फरवरी को दोनों दारोगाओं ने 15 लाख की रकम पीड़ित को वापस कर दी। एसएसपी अविनाश पांडेय के संज्ञान में आने पर मामले में दोनों दारोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ भी की गई लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

रिकार्ड भी ढूंढ रही पुलिस
पुलिस लोकेंद्र साहू और महेश गंगवार का पुराना रिकार्ड भी ढूंढ रही है। महेश गंगवार के परिवार पर बरेली में भी मुकदमे दर्ज हैं। एएसपी अंतरिक्ष जैन का कहना है कि लिसाड़ीगेट और स्वाट टीम दोनों की तलाश कर रही है। उन्होंने मोबाइल बंद किए हैं। वह हाई कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे लेने की फिराक में हैं।

15 लाख रिकवरी के बाद दारोगाओं को हिरासत से क्यों छोड़ा
20 लाख रुपये की वसूली में फंसे दारोगा मोनिंदर साहू और महेश गंगवार से 15 लाख रुपये की रिकवरी करने के बाद पुलिस हिरासत से क्यों छोड़ा गया। दारोगाओं को इंस्पेक्टर अरुण मिश्रा ने उठाया था। पूछताछ में दरोगाओं ने 20 लाख की वसूली की बात भी कुबूल कर ली थी। इसके बाद भी दोनों को पुलिस हिरासत से छोड़ दिया गया। हालांकि अब उनको पकड़ने के लिए पुलिस इनाम घोषित करने की संस्तुति कर टीम भी गठित कर रही है। माना जा रहा है कि पुलिस ने उन्हें बचाने के उद्देश्य से हिरासत से छोड़ा, ताकि वे हाई कोर्ट से गिरफ्तारी स्टे ले सकें । एएसपी अंतरिक्ष जैन का कहना है कि दारोगाओं को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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