Saturday, March 14

द केरल स्टोरी, कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्में कर रही समाज को सचेत: सुधांशु महाराज

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मेरठ 14 मार्च (प्र)। आध्यात्म, संस्कार, और सनातन संस्कृति को एकजुट करने के लिए सनातन सांस्कृति जागरण महोत्सव का आयोजन आईटीआई मैदान साकेत में किया जा रहा है। जहां देशभर से साधु संतु का आगमन हो रहा है। शुक्रवार को सुधांशु महाराज ने बातचीत कर वर्तमान समाज, व लव जिहाद, धर्मांतरण, आतंकवाद के बदलते स्वरूप, सोशल मीडिया के प्रभाव और सनातन समाज की एकजुटता जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से विचार रखे।

आजकल लव जिहाद जैसे मामलों को लेकर समाज में चर्चा हो रही है। इसे रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
सुधांशू:
इस विषय पर सबसे पहले माता-पिता की जिम्मेदारी बनती है वे अपने बच्चों को अपने धर्म, संस्कृति और मूल्यों के बारे में सही जानकारी दें। जब बच्चों को अपनी जड़ों और परंपराओं की समझ होती है तो वे आसानी से किसी भ्रम या गलत दिशा में नहीं जाते। समाज में जागरूकता लाने के लिए द केरला स्टोरी और द कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों के माध्यम से भी लोगों को सचेत करने का प्रयास किया गया है। इसलिए जरूरी है कि लोग जागरूक बनें, जानकारी रखें और समाज को भी सजग करें।

आज के समय में कहा जाता है कि आतंकवाद का रूप बदल गया है और पढ़े- लिखे लोग भी इसमें शामिल हो रहे हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
सुधांशु:
आज आतंकवाद का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है। पहले माना जाता था कि शिक्षा मिलने से व्यक्ति सही मार्ग पर आ जाएगा लेकिन आज कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और वैज्ञानिक लादेन जैसे पढ़े-लिखे लोग भी आतंकवाद से जुड़े पाए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है केवल आधुनिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। जरूरी है शिक्षा के साथ- साथ अच्छे संस्कार और मानवता के मूल्य भी दिए जाए। यदि पढ़े-लिखे लोगों के विचारों को गलत दिशा में मोड़ा जा सकता है तो समाज को और अधिक सजग होने की आवश्यकता है। इसलिए बच्चों और युवाओं को केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि नैतिकता, संस्कार और मानवता की शिक्षा देना भी उतना ही आवश्यक है।

आज के समय में बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया में ज्यादा समय दे रहे हैं ?

सुधांशु : सोशल मीडिया का उपयोग केवल मनोरंजन नहीं बल्कि दादी-नानी की परंपराओं, संस्कृति और इतिहास को याद दिलाने के लिए भी होना चाहिए। संचार क्रांति ने जीवन आसान किया है लेकिन संस्कारों का क्षरण भी हुआ है। पहले गुरुकुल शिक्षा में ज्ञान के साथ संस्कार मिलते थे लेकिन अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था ने लोगों को अपनी जड़ों से दूर कर दिया। इसलिए आज जरूरत है कि समाज फिर से अपनी संस्कृति और मूल्यों की ओर बढ़े।

युवाओं को भारतीय संस्कृति और सत्संग से जोड़ने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
सुधांशुः
आज का युवा सोशल मीडिया और मोबाइल गेम्स में अधिक समय बिताने लगा है। अगर इन माध्यमों का सही उपयोग किया जाए तो इन्हीं प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय संस्कृति सत्संग और अच्छे संस्कारों का संदेश भी फैलाया जा सकता है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कारों और संस्कृति से जोड़ा जाए ताकि आधुनिकता के साथ-साथ भारतीय मूल्यों का भी संरक्षण हो सके।

धर्मातरण, और समाज को लेकर क्या कहना चाहेंगे ?
सुधांशु :
आज के समय में समाज को जागरूक और सजग रहने की जरूरत है। कई बार देखा जाता है पड्यंत्र के तहत युवाओं को प्रेम के नाम पर भ्रमित करके धर्मांतरण कराने की कोशिश की जाती है। इसलिए सबसे पहले माता-पिता को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने चाहिए और उन्हें सही- गलत की समझ देनी चाहिए।

अक्सर मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं लेकिन सनातन समाज में वैसी एकजुटता क्यों नहीं दिखाई देती?
सुधांशुः
यह एक विचार करने का विषय है कि जब मुस्लिम ब्रदरहूड की बात होती है तो सनातन समाज में उसी प्रकार की एकजुटता क्यों नही दिखाई देती। इसका एक कारण यह भी है कि समय के साथ समाज कई जातियों और समूहों में बंट गया है। कई बार इन विभाजनों का लाभ राजनीतिक स्तर पर भी उठाया जाता है। समाज को एकजुट करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। इसके लिए महाआरती अभियान और सामूहिक पूजा जैसे कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। लोग जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और सामूहिकता की भावना को मजबूत करें।

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