Saturday, April 11

अधर में लटकी इनर रिंग रोड, शासन का धन देने से इंकार

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मेरठ 11 अप्रैल (प्र)। शहर को जाम से छुटकारा दिलाने के लिए इनर रिंग रोड व आउटर रिंग रोड के निर्माण का मामला अधर में लटक गया। शासन ने रिंग रोड के लिए 62 सौ करोड़ रुपये देने से इंकार कर दिया। जबकि मेरठ में अन्य योजनाओं के लिए हरी झंडी दिखा दी है। जबकि मेरठ में यह मांग पिछले बीस सालों से चली आ रही है। अब यह मांग कब पूरी होगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जबकि छह महीने पहले ही राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र तोमर व कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने रिंग रोड निर्माण के लिए कमिश्नर से मुलाकात भी की, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया। 15 दिन पहले ही शासन ने मेरठ के विकास के लिए कई योजनाओं को हरी झंडी दिखाई है। इसके लिए करोड़ों रुपये का बजट भी दिया है। इनर रिंग रोड के लिए 62 सौ करोड़ रुपये जारी करने से साफ इंकार कर दिया। जिससे यह योजना अधर में लटक गई। जबकि मेरठ विकास प्राधिकरण के पास इस योजना के लिए सौ करोड़ रुपये आरक्षित है।

ये इनर रिंग रोड बनाने का उद्देश्य
यातायात की समस्या को कम करना और विभिन्न राज्यमार्गों को आपस में जोड़ना ।
प्रस्तावित इनर रिंग रोड की कुल लंबाई लगभग 34.19 किलोमीटर है।
इस खंड के बनने से हापुड़ बुलंदशहर हाईवे दिल्ली रोड और दून हाईवे से सीधे जुड़ सकेगा।
पहले चरण में प्राधिकरण की वेदव्यासपुरी योजना से दिल्ली रोड (1.20 किमी) और दूसरे
चरण में दिल्ली रोड शताब्दीनगर योजना से हापुड़ रोड (4.50 किमी) तक निर्माण प्रस्तावित है।
इनर रिंग रोड पर दो फ्लाईओवर और दो आरओबी भी बनाए जाएंगे।
प्राधिकरण 45 मीटर के स्थान पर वर्तमान में 24 मीटर चौड़े मार्ग का निर्माण करेगा और 10.50 मीटर जमीन हाईवे के लिए आरक्षित करेगा। इस प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा।

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