Friday, March 1

अखिल भारतीय बिश्नोई मिलन ने की केके बिश्नोई को कैबिनेट मंत्री बनाने की मांग, राजस्थान और मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में बिश्नोई समाज को दिया जाए उचित प्रतिनिधित्व

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पांच राज्यों के बीते दिनों हुए चुनावों के बाद भाजपा द्वारा मध्य प्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बनाई गई सरकारों में मुख्यमंत्री बनाने में काफी अहतियात बरता गया और कुछ नए लोगों को भी मौका दिया गया लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान में बिश्नोई समाज के मतदाता भारी संख्या में निवास करते हैं। और पिछले कई चुनावों से इनके द्वारा अपने मत भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किए जा रहे कार्यो को देखकर भाजपा उम्मीदवारों को ज्यादातर दिए जाते रहे बताए जाते हैं लेकिन मंत्रीमडल के गठन में संतुलन बनाने में शायद जिम्मेदार नेता सफल नहीं रहे क्योंकि अकेले राजस्थान में जहां राजपूत समाज संतुष्ट नहीं है और उसके नेताओं का कहना है कि हम किसी के गुलाम नहीं है और सरकार में उचित प्रतिनिधित्व ना मिलने से नाराज इस समाज के नेताओं का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में देंगे जवाब। लेकिन बिश्नोई समाज के कई नेताओं का कथन है कि मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलना ना मिलना अलग बात है वोट तो समयानुकुल निर्णय लेकर ही देंगे लेकिन अखिल भारतीय बिश्नोई मिलन के राष्ट्रीय महामंत्री अंकित बिश्नोई का कहना है कि राजस्थान मंत्रिमंडल गठन में एकमात्र केके बिश्नोई को राज्यमंत्री बनाकर इस समाज की भावनाओं को आहत और अपमानित किया गया हैं कम से कम एक केबिनेट और राज्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। अगर संतुलन नहीं बन रहा था तो केके बिश्नोई को ही कैबिनेट मंत्री बनाया जाता तो समाज संतुष्ट होता। बिश्नोई ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नडडा से मांग की है कि राजस्थान मंत्रिमंडल में बिश्नोई समाज से एक और मंत्री बनाया जाए क्योंकि अगर राजपूत समाज के बाद बिश्नोई समाज खिलाफ हुआ तो और भी कई समाज जो मंत्रिमंडल में उचित स्थान ना मिलने से संतुष्ट नहीं है वो भी खिलाफ हो सकते है जो सत्ताधारी दल के लिए परेशानी का कारण बन सकते है। इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। स्मरण रहे कि राजस्थान में 22 विधायकों को मंत्री बनाया गया है जिनमें से 12 कैबिनेट, पांच को स्वतंत्र प्रभार और पांच राज्यमंत्री बनाए गए बताए जा रहे हैं। बताते चलें कि हरियाणा राजस्थान में बिश्नोई समाज बहुतायत में है और यूपी और मध्यप्रदेश में इस समाज के लोग जीत हार में निर्णायक भूमिका कई लोकसभा क्षेत्रों में निभाते हैं।

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