Monday, April 15

भाजपा सांसद किरणखेर ने शख्स को दी जान से मारने की धमकी, पीड़ित ने हाईकोर्ट से लगाई सुरक्षा की गुहार

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चंडीगढ़ 12 दिसंबर। चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर पर पैसा दोगुना कर वापस नहीं करने की स्थिति में परिवार को खत्म करने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए मनीमाजरा निवासी व्यापारी ने सुरक्षा के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अब याचिकाकर्ता व उसके परिसर को सुरक्षा मुहैया करवाने का एसपी व मनीमाजरा के एसएचओ को आदेश दिया है।

याचिका दाखिल करते हुए चैतन्य अग्रवाल ने हाईकोर्ट को बताया कि वह निवेश सलाहकार के तौर पर कार्य करता है। उसे सांसद किरण खेर ने आठ करोड़ रुपये निवेश के लिए दिए थे। याची ने इसे बाजार में लगाया था। इससे पहले भी याची किरण खेर को निवेश के माध्यम से अच्छा मुनाफा दिला चुका था। याची ने बताया कि 23 अगस्त को उसे यह पैसा निवेश के लिए मिला था, लेकिन उसी दौरान बाजार में मंदी आ गई। इस पर किरण खेर ने उसे तुरंत पैसा लौटाने को कहा। याची ने दो करोड़ रुपये वापस कर दिए और बाजार का हवाला देते हुए बाकी पैसा जमा करवाने के लिए कुछ मोहलत मांगी।

इस दौरान याची को किरण खेर ने अपने घर बुलाया। 1 दिसंबर किरण खेर के घर में पहुंचने पर याची की तलाशी ली गई और घड़ी से लेकर मोबाइल तक अपने पास रखवा लिया गया। इस दौरान उसको खूब बेइज्जत किया गया और उसका शारीरिक उत्पीड़न भी किया गया। आरोपी के अनुसार इसमें किरण खेर, उनके पीए सहदेव सलारिया व अन्य लोग शामिल थे। याची के गिड़गिड़ाने पर उसे कपड़े पहनने को दिए गए। इसके बाद याची के घर से लैपटॉप व चेक मंगवाए गए। याची से 7.44 करोड़ व 5.56 करोड़ के पोस्ट डेटिड चेक लिए गए और कहा गया कि 15 दिसंबर तक यदि दोगुना पैसा नहीं मिला तो पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। याची ने कहा कि किरण खेर रसूखदार हैं और ऐसे में याची व उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए।

चंडीगढ़ पुलिस की ओर से कहा गया कि शहर के किसी भी थाने में याची पक्ष की ओर से कोई शिकायत नहीं दी गई है। इसके साथ ही यदि ऐसा कुछ हुआ था तो आपातकालीन सेवाओं के लिए जारी नंबर पर याची को कॉल करना चाहिए था।

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस विवाद को लेकर सुरक्षा से जुड़ी याचिका में हम कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार संविधान प्रत्येक नागरिक को देता है। यदि यह न्यायालय उन्हें फिलहाल सुरक्षा नहीं देता है, तो यह संवैधानिक क्षेत्राधिकार का प्रयोग न करने के समान होगा है। ऐसे में हाईकोर्ट ने एसपी व एसएचओ को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता व उसके परिवार को एक सप्ताह के लिए सुरक्षा दी जाए। इसके बाद समीक्षा की जाए कि उन्हें आगे सुरक्षा की आवश्यकता है या नहीं।

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