Friday, April 19

बढ़ते अपराधों की सुर्खियां चुनाव में सत्ताधारी दल को ?

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बदायूं में 12 साल के आयुष और 6 साल के अहान का बेदर्दी से कत्ल तो प्रयागराज में बुआ ने तीन और पांच साल के भतीजां को मौत के घाट उतारा। ऐसी ही घटनाएं मीडिया में अब पढ़ने को रोज मिलना आम बात होती जा रही है। कत्ल चाहे रिश्तों का हुआ हो अथवा दुश्मनी में लेकिन ग्रामीण कहावत दोष किसी का हो सजा किसी को के समान कई नागरिक इसके लिए सरकार को बिना सोचे समझे दोष देने लगते हैं जिससे कम या ज्यादा शासन और सत्ताधारी दल व उसके सहयोगियों पर लोग व्यवस्था और शांति बनाए रखने में कामयाब ना होने की बात तो करते नजर आने ही लगते हैं।
सरकार का स्पष्ट निर्देश तथा केंद्र से   लेकर प्रदेश तक सभी प्रमुख नेताओं के दुष्कर्म रोकने और आरोपियों को सख्त से सख्त सजा देने तथा अपराधिक घटनाओं को प्रतिबंधित करने के लिए अपराधियों पर शिकंजा कसने के आदेशों के बावजूद कई मामलों में पढ़ने सुनने को मिलता है कि दुष्कर्म पीड़िता की रिपोर्ट नहीं लिखी गई या जहां वो सुरक्षा मांगने गई वहीं उसका उत्पीड़न हुआ। दूसरी तरफ ब्राहमण त्यागी समाज के प्रमुख नेता मांगेराम त्यागी के विरूद्ध मुजफ्फरनगर में एफआईआर और कई जगह मजलूमों पर होने वाले जुल्म से ऐसा लगता है कि कुछ लोग कारण और सोच कुछ भी हो कहे अनकहे रूप से गलती या जानबूझकर मुझे लगता है कि सरकार के खिलाफ अपनी हरकतों से माहौल बनाने का प्रयास करने में नागरिकों के अनुसार संलग्न हो सकते हैं।
देशभर में लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। कई प्रदेशों में उपचुनाव भी इसी के साथ होना है। और पक्ष और विपक्ष सब इसमें अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में गलत हो या सही मीडिया में अपराधों से संबंध खबरों का बढ़ना किसी भी रूप में उचित नहीं कहा जा सकता। मुझे लगता है कि केंद्र व प्रदेश की    सरकारों को अपना काम ना कर घोषणा मंत्री बनते जा रहे कुछ अफसरों पर अंकुश लगाते हुए हर आदमी को पीएम मोदी व सीएम योगी की भयमुक्त वातावरण में सांस लेने का मौका उपलब्ध कराने की भावना के तहत कार्रवाई समयानुसार की जानी चाहिए। जिससे नागरिक बिना किसी दबाव के स्वतंत्र सोच के साथ अपना वोट का उपयोग कर सके। और निर्वाचन आयोग की मतदान बढ़ाने की मंशा भी हो पूरी।
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