Monday, April 15

बच नही पाएंगे घोटाले बाज़, 31000 करोड़ की हेरा फेरी करने वाले ऑडिटरों की सेवा पर प्रतिबंध के साथ लगया जुर्माना

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दिल्ली,  3 दिसंबर।   घोटाला चाहे सरकारी संस्था में हो या प्राइवेट आरोपी यह समझने की भूल न करे कि ऑफ सही हो जाने या फाइनल रिपोर्ट लग जाने आथवा जांच क्लियर होने पर आरोपी यह न समझे कि वो बच गए है ।

क्योंकि पिछले लगभग 10 साल में मौखिक सूत्रों के अनुसार एन जी ओ सामाजिक संस्था ,रियल एस्टेट आदि में हुए जिन घोटालो के निस्तारण के बाद सूचना का अधिकार या जनहित याचिका अथवा मौखिक या लिखित शिकायत पर कई प्रकरण खुले और जांच मैं बरी हुए व्यक्ति द्वारा दोषी करार दिए गए और उन पर जुर्माने आदि भी लगे जानकारों के अतिरिक्त इसके जीते जागते उदाहरण के रूप में हम इस खबर को देख सकते है .

राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलएटी) ने 31 हजार करोड़ की हेराफेरी को नजरअंदाज करने वाले ऑडिटरों पर लगाए गए जुर्माने को सही माना है। अधिकरण ने डीएचएफएल के खिलाफ राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) के आदेश को बरकरार रखा है। एनएफआरए ने 30 सितंबर को डीएचएफएल के 18 आंतरिक ऑडिटरों पर 18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, साथ ही उनके कहीं भी ऑडिटर के तौर पर काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। नियामकीय जांच में पाया गया कि डीएचएफएल की अलग-अलग शाखाओं में ऑडिटर के तौर पर काम करने वाले लोगों ने अपने कर्तव्यों का उल्लंघन किया था।

आदेश जागरूक करने वाला
एनसीएलएटी के जस्टिस राकेश कुमार जैन और तकनीकी सदस्य नरेश सलेचा ने एनएफआर के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि आदेश में कोई खामी नहीं है। बल्कि, एनएफआरए का आदेश. जनता को जागरूक बनाने और उन्हें अच्छे वित्तीय निर्णय लेने में मदद करने में प्रभावी बनाने के लिए बेहद जरूरी है। एनसीएलएटी ने स्पष्ट किया कि एनएफआरए के आदेशों से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का कोई उल्लंघन नहीं होता है।

एनएफआरए के पास पर्याप्त अधिकार
आदेश में कहा गया है कि एनएफआरए के पास आईसीएआई की शक्तियों और प्राधिकार की तुलना में आईसीएआई के सदस्यों के पेशेवर कदाचार को रोकने के लिए पर्याप्त शक्तियां और अधिकार हैं। अधिकरण ने कहा कि ऑडिटरों की नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई बदलाव की जरूरत नहीं है। लेकिन, ऑडिटिंग के वही मानक शाखा ऑडिट में भी लागू होते हैं, जो किसी विधिक ऑडिट पर लागू होते हैं। ऑडिटिंग के मानक सीए के लिए केवल मार्गदर्शन मात्र नहीं है, बल्कि इनका पालन करना अनिवार्य है। अपीलकर्ताओं की तरफ से ऑडिटिंग के मानकों का उल्लंघन किया गया है, लिहाजा एनएफआरए की तरफ से लगाए गया जुर्माना भी उचित है।

जानकारों का मौखिक रूप से यह भी कहना है कि अगर घोटाले की कोई फाइल खुलवाने के प्रयास जनहित में किये जाते है तो किसी भी प्रकार की राशि,जमा नही करनी पड़ती ।

मौखिक चर्चा और सूत्रों के कथन में कितनी सत्यता है यह तो जांच का विषय है लेकिन अगर ऐसा होता है तो अनेक घोटाले खुलने दोषियों के जेल जाने और संस्थाओं को उनकी सेवा पर प्रतिबंध लग सकता है ।

जनहित मैं प्रसारित

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