Saturday, February 24

गांधी जी को राष्ट्रपिता कहने को चाटुकारिता की संख्या देने वाले योग गुरू पदमश्री स्वामी जी के खिलाफ सरकार करे कार्रवाई

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अंर्तराष्ट्रीय योग संस्थान नेशन बिल्डर्स अकाडेमी एवं राष्ट्र वंदना मिशन द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयन्ती पर आयोजित कार्यक्रम में योग गुरू पदमश्री स्वामी भारत भूषण द्वारा राष्ट्रपिता के बारे में जो कहा गया मेरी निगाह में वो निदंनीय है और हमें सामूहिक रूप में सबको इसकी निंदा भी करनी चाहिए। क्योंकि देश की स्वंत्रतता और आजादी के जिस माहौल में हमें श्वास लेने का अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगभग हर देशवासी गांधी जी का ऋणी है और अपनी भावनाओं से प्रेरित होकर उन्हें राष्ट्रपिता कहता है ना कि चाटुकारिता के तहत।
मेरा योग गुरू पदमश्री भारतभूषण जी के बारे में कुछ भी अशोभनीय कहने का तो इरादा नहीं है लेकिन ये जरूर कह सकता हूूं कि उन जैसे ज्ञानवान व्यक्ति जिसे पदमश्री जैसे सम्मान से नवाजा गया हो उनको इस प्रकार की भावनाऐं व्यक्त नहीं करनी चाहिए क्योंकि जिस सरकार से पदमश्री पुरस्कार प्राप्त कर स्वामी ही गौरांवित हो रहे वो सरकार भी गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित करती है।
मुझे लगता है कि स्वामी जी को अपने शब्द वापस लेकर जो ठेस उन्होंने देशवासियों को पहुंचाई है उसके लिए उनसे उन्हें क्षमा मांगनी चाहिए। राष्ट्रीय सहारा में छपी एक खबर के अनुसार योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने कहा कि राष्ट्रपिता कहकर महात्मा गांधी को शर्मिदा न करें उन्होंने कहा कि हमने चाटुकारिता या स्वार्थ की हदें पार करते हुए, गांधीजी को राष्ट्रपिता कहना शुरू कर दिया जो गांधी जी के प्रति सरासर अन्याय है। योग गुरु पदमश्री स्वामी भारत भूषण यहां मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योग संस्थान नेशन बिल्डर्स अकादमी व राष्ट्र वंदना मिशन द्वारा गांधी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि दो अक्टूबर को ही जन्म लेने वाले लाल बहादुर शास्त्री कई अर्थाे में अपने प्रेरक गांधी जी को पीछे छोड़ गए। उन्होंने कहा कि गांधी जी को बैरिस्टर और एक प्रभारी महानायक बनाने में उनकी समृद्ध पारिवारिक पृष्ठभूमि सहयोगी रही। लेकिन शास्त्री जी ननिहाल में पलने वाले वे बच्चे रहे जिनके पास स्कूल जाने के लिए नाविक को देने के लिए पैसे भी नहीं होते थे। स्वामी भारत भूषण ने कहा कि गांधी जी महान जननायक होते हुए भी पक्षपातपूर्ण रवैये के लिए जाने जाते है लेकिन शांस्त्री जी का त्याग सत्य निष्ठा, कर्तव्य परायणता और स्वाभिमानी अप्रिग्रह है जो प्रधानमंत्री होने पर भी लड़खड़ाया नहीं। उनके बेटे भी साइकिल पर जाने वाले आम बच्चे ही रहे।
उन्होंने कहा कि आज गांधी होते तो अपने लिए राष्ट्रपिता शब्द सुनकर बहुत दुःखी और शर्मिंदा होते। हमने चाटुकारिता और स्वार्थ की हदें पार करते हुए गांधी जी को राष्ट्रपिता कहना शुरू कर दिया जो गांधी जी के लिए सरासर अन्याय है। उन्होंने कहा कि गांधीजी अपने लिए अन्य अनेक महानायकों की तरह इस राष्ट्र के सपूत शब्द सुनना ही पसंद करेंगे।
स्वामी जी लालबहादुर शास्त्री जी का सम्मान भी हमारे दिलों में कम नहीं है देशवासी उनकी कुर्बानियों और जय जवान जय किसान का नारा जो पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लालबहादुर शास्त्री जी द्वारा दिया गया था उसे ही स्मरण रखते है और यह सर्वविधित है कि सबका अपना अपना देश वासियों के दिलों में सम्मान है इसलिए किसी की भी तुलना किसी से नहीं की जानी चाहिए।
जहां तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की बात है वहां तक हम ही नहीं दुनिया के कई देशों में वहां के नागरिकों के साथ साथ वहां रहने वाले भारतवंशी भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के रूप में याद करते है और कई देशों में उनकी मूर्तियां स्थापित है जहां 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि सुमन भेंट किये जाते है।
मेरा मानना है कि केन्द्र और प्रदेश की सरकार को स्वामी जी के संबोधन का संज्ञान लेकर इस संदर्भ में जो भी कार्रवाई हो सकती है वो करनी चाहिए। क्योंकि आज उन्होंने जिन शब्दों का उपयोग राष्ट्रपिता के बारे में किया है कल को वो या कोई और बाद में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री या मानवहित की सोचने वाले माननीय मुख्यमंत्री जी के बारे में कर सकते है और इससे तनाव उत्पन्न होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसे शब्दों से नाराज होकर समर्थक कुछ भी करने को तैयार हो जाते है जो बाद में हिंसा तक पहुंचने की बात से इनकार नही कर सकते क्योंकि महापुरूषों के सम्मान और देश हित में किसी भी प्रकार बदअमनी को उचित नहीं कहा जा सकता है और वो भी किसी व्यक्ति विशेष के कारण हो ये तो बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

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