Friday, March 1

हीरा एडवरटाइजिंग और प्रधान इंफा वैंचर्स को काली सूची में डाला

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मेरठ 16 दिसंबर (प्र)। नगर निगम में लगातार कई वर्षों से विज्ञापन का टेंडर लेने वाली दोनो कंपनियों को आखिरकार गत दिवस नगर निगम द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। पूर्व में दोनों कंपनी कम रेट पर टेंडर लेने के बाद मानकों के विपरीत होर्डिंग आदि लगाकर मोटा मुनाफा कमा रही थी। नगर निगम चुनाव के बाद पहली बोर्ड बैठक में विज्ञापन में बडे“ घोटाले का आरोप लगाते हुए पार्षदों ने मामले की जांच कराकर दोषी निगम के कर्मचारी व अधिकारी के साथ संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।साथ ही जिन नियम शर्तों पर ठेका दिया जाता है, उस अनुबंध को भी बोर्ड बैठक में दिखाने की बात कही थी। जिसको लेकर महापौर हरिकांत अहलूवालिया के साथ भाजपा के दिग्गज नेताओं के सामने नगर निगम के अधिकारी बगल झांकते नजर आए। जिसमें विज्ञापन के पूरे मामले की जानकारी आगामी बोर्ड बैठक में देने का आश्वासन पार्षदों को दिया गया, तब जाकर मामला शांत हुआ।

बोर्ड बैठक के बाद इस बार नगर निगम द्वारा विज्ञापन का टेंडर छोड़े जाने में कुछ पारदर्शिता दिखाई तो यह टेंडर जोकि पूर्व में ढाई से तीन करोड़ रुपये में छोड़ा जाता था,वह इस बार सात करोड़ रुपये से अधिक में दोनो कंपनियों लेने के लिए टेंडर डाल दिया। दोनों कंपनी के द्वारा टेंडर तो अपने नाम करा लिया, लेकिन टेंडर की नियम व शर्तों को पूरा नहीं किया गया। जिसके चलते दोनों कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। नगर निगम द्वारा दो वर्ष के लिए विज्ञापन का टेंडर निकाला गया था। जिसमें वित्तीय वर्ष-2023-24 व 2024-25 में श्रेणी ए, बी, सी व डी में नगर निगम द्वारा (आकाश चिन्ह, विज्ञापनों का विनियमन और नियंत्रण एवं अनुज्ञाप्ति शुल्क वसूली) उपविधि 2022 के क्रम में आमंत्रित ई-निविदा के द्वारा दो अलग-अलग कंपनियों को दिया गया। जिसमें ई-निविदा की अधिकतम दरें प्राप्त होने पर मैसर्स हीरा एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड एवं मैसर्स प्रधान इंफा वैन्चर्स को स्वीकृति की सूचना 8.अगस्त 2023 को प्रेषित की गयी थी।

जिसके उपरान्त तीन अनुस्मारक पत्र, चेतावनी देने के बाद भी धनराशि जमा न करने के फलस्वरूप मैसर्स हीरा एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड के बैंक गारंटी के रूप में रुपये 25 लाख एवं एफडीआर के रूप में रुपये 15 लाख तथा मैसर्स प्रधान इंफा वैन्चर्स के बैंक गारंटी के रूप में रुपये 30 लाख एवं एफडीआर के रूप में 22.5 लाख जब्त करते हुए उक्त दोनों फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इस प्रकार नगर निगम द्वारा कुल रुपये 92.5 लाख की धनराशि जब्त की गयी।

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