Thursday, June 13

बढ़ती दुर्घटनाएं, आरटीओ और यातायात पुलिस विभाग बताया जाता है जिम्मेदार!

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लोहे के गाटर ढोती तीन पहिया रिक्शा, क्षमता से ज्यादा सामान लेकर चलने वाली ट्रॉलियां, मानकों पर खरे ना उतरने वाले वाहन, उपभोक्ताओं को पूरी सुविधाएं ना मिलना हैं दुर्घटनाओं का कारण
आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के लिए पुलिस से लेकर प्रशासन और सरकार तथा कुछ पिछलग्गुओं द्वारा कभी सड़कों में बने कट तो कभी हेलमेट ना लगाने और कभी लापरवाही से वाहन चलाने अथवा रॉग साइड चलने को दोषी ठहराकर अपने जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने की कोशिश की जाती है। लेकिन यह बड़े ताज्जुब की बात है कि मार्ग दुर्घटनाओं का असली कारण सब जानते हैं मगर उन पर बोलने और उन्हें उठाने की हिम्मत या जहमत कोई नहीं उठाता। परिणामस्वरूप जहां तक हमें लगता है सरकार इन्हें रोकने के लिए पैसा भी खर्च कर रही है और नियम भी बना रही है। मगर ग्रामीण कहावत ज्यों ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता ही गया। लेकिन यहां इस मामले में दवा करने की कोशिश तो की जा रही है लेकिन बीमारी को सही प्रकार से ढूंढकर उसका इलाज करने को कोई तैयार नजर नहीं आ रहा है। इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं यह किसी को बताने या समझाने की आवश्यकता नहीं है। जागरूक बच्चा-बच्चा जानता है। अभी पिछले दिनों मध्य प्रदेश में जब बस दुर्घटना हुई जिसमें आग लगने से 13 यात्री जिंदा जल गए। सरकार ने हर मृतक को चार-चार लाख रूपये देने का ऐलान किया है। और दुर्घटना की जांच के लिए समिति भी गठित की है। जबकि सब जानते हैं और खबरों में खूब आ रहा है कि जिस बस में यह दुर्घटना घटी उसमें ना तो फिटनेस प्रमाण था ना उसका रजिस्टेशन रद किया गया था। सरकार ने कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है लेकिन उससे जहां तक मुझे लगता है यह दुर्घटनाएं रूकने वाली नहीं है। ऐसा मध्य प्रदेश में हो रहा हो ऐसा नहीं है। क्योंकि जितना खबरें पढ़ने मीडिया में देखने और सुनने को मिलती है उनमें सौ में से 90 घटनाएं किसी ना किसी अवैध रूप से चलने वाले वाहनों से होना बताई जाती है। एक खबर के अनुसार यूपी के मेरठ में एक रजिस्ट्रेशन में छह ई रिक्शा दौड़ रही थी। इसके अलावा लोगों का कहना है कि अन्य वाहन भी बड़े तादात में अवैध रूप से दौड़ रहे हैं। और कार्रवाई ना होने के चलते इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसा नहीं है कि यह बात आरटीओ विभाग या यातायात पुलिस को पता ना हो। लेकिन विभिन्न्न चौराहों पर खड़े इन दोनों विभागों के लोग सिर्फ वाहन चालकों और खासकर दूसरे जिले और प्रदेश की गाड़ियों को टारगेट करने में ज्यादा ध्यान देते हैं। जबकि इनसे ज्यादा खतरनाक और दुर्घटनाओं की संभावनाओं को बढ़ाने वाले जुगाड़ से बने रिक्शा और टैªक्टर ट्राली भी कम जिम्मेदार नहीं है क्योंकि तीन पहिया वाहन में कई फुट लंबे सरिये गाटर व अन्य खतरनाक सामान ले जाया जाता है और उनमें लाइट ना लगी होने और लाल कपड़ा ना बंधा होने से दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है तो दूसरी ओर टैªक्टर ट्रॉलियांे में प्रतिबंध के बावजूद सामान भरकर ले जाया जाता है और क्षमता से ज्यादा लदान भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं मगर यातायात पुलिस और आरटीओ विभाग के लोग छोटे वाहनों को रोककर नागरिकों को परेशान तो करते हैं लेकिन जहरीला धुंुआ छोड़ते थ्री व्हीलर लंबे लंबे सरिया ले जाने वाले तीन पहिया रिक्शा और कई गुना ज्यादा सामान ले जाने वाली टैªक्टर ट्रॉलियां जो इनके सामने से गुजरती है ना उन्हें रोका जाता है और ना कोई कार्रवाई की जाती है। मेरा मानना है कि काफी दुर्घटनाओं और प्रदूषण का कारण यह वाहन ही बनते हैं। मुझे लगता है कि सरकार प्रशासन आरटीओ विभाग यातायात पुलिस पहले जो सुविधाएं वाहन चालकों को मिलनी चाहिए वो उपलब्ध कराएं। दूसरे कई कई मील चलने के बाद जो कट होते हैं उन्हें सही कराएं तथा लोहे के गाटर सरिये भरकर ले जाने वाले तीन पहिया वाहनों टैªक्टर ट्रॉलियां और अवैध वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ साथ जहां यह वाहन पकड़े जाएं उस क्षेत्र के संबंधित यातायात पुलिसकर्मियों और आरटीओ कर्मचारियों को किया जाए निलंबित। वरना दुर्घटनाएं होती रहेंगे सरकार आम आदमी के टैक्स की कमाई से मुआवजे बांटती रहेगी मगर दुर्घटनाएं रूकने वाली नहीं है। यह तभी रूक पाएंगी जब अवैध वाहनों पर रोक लगे। मेरा तो मानना है कि जो यह लोहा और खतरनाक सामग्री अनाधिकृत रूप से ले जाते हैं उस व्यापारी के खिलाफ भी हो कार्रवाई जिसके यहां से सामान लेकर आता है तभी जाम से मुक्ति और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगने की संभावनाएं बन सकती है।

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