Thursday, June 13

अब मेयर संस्पेंड कर सकेंगे ग्रुप सी व डी कर्मचारीः मनोहर लाल

Pinterest LinkedIn Tumblr +

चंडीगढ़ 13 अक्टूबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शहरों की छोटी सरकार के लिए सत्ता का विकेन्द्रीकरण करने की कड़ी में एक ओर पहल करते हुए नगर निगमों के मेयर को जे.ई. सहित ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों को सस्पेंड करने के लिए अधिकृत किया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने बैठक में मेयरों की प्रशासनिक स्वीकृति को 2.50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने गत दिवस हरियाणा निवास में राज्य के नगर निगमों के मेयरों व सीनियर डिप्टी मेयरों की बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने नगर निगमों के मेयर को जे.ई. सहित ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों को सस्पेंड करने के लिए अधिकृत किया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने बैठक में मेयरों की प्रशासनिक स्वीकृति को 2.50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने की घोषणा भी की।मुख्यमंत्री ने कहा कि मेयर एक बड़े क्षेत्र का चुना हुआ प्रतिनिधि होता है। हमारी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में पंचायती राज संस्थानों के लिए भी सत्ता का विकेन्द्रीकरण कर कई प्रकार के अधिकार दिए हैं। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में सत्ता का केन्द्रीकरण होता था, जबकि हमने सत्ता का विकेंद्रीकरण किया है। उन्होंने कहा कि कल की कैबिनेट बैठक में शहरों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उनके क्रियान्वयन में मेयरों और पार्षदों की बड़ी भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे लोगों को इस बारे में जागरूक करें ताकि मॉडल टाउन जैसी पुरानी कॉलोनियों में चल रही शॉपिंग मॉल जैसी गतिविधियों को कानूनी रूप में नियमित करवा जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय वित्त आयोग तथा राज्य वित्त आयोग की तरफ से नगर निगमों को तीसरी तिमाही का लगभग 600-700 करोड़ रुपये आवंटित किया जाना है। मेयर अपने क्षेत्र के विकास कार्यों का अनुमान तैयार करें और शीघ्र ही इसे सरकार को भिजवाएं।

सीएम ने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में सरकार द्वारा 404 कॉलोनियां नियमित की गई हैं, जिनमें से 151 कॉलोनियां नगर निगमों के अंतर्गत आती हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगमों का दायरा बढ़ने से कई गांव इसमें शामिल हुए हैं तथा इन गांवों में लाल डोरे के दायरे से बाहर कई कॉलोनियां बन गई हैं, जिसमें कृषि भूमि भी शामिल है और इस पर नगर निगमों द्वारा लगभग 4 करोड़ रुपये का सम्पति कर लगाया है, जिसे लौटाना होगा क्योंकि कृषि भूमि पर किसी प्रकार का सम्पति कर नहीं लगाया जा सकता। सरकार द्वारा इन कॉलोनियों का सर्वे करवाया जाएगा ताकि वहां की सम्पतियों का भी क्रय व विक्रय हो सके।

Share.

About Author

Leave A Reply