Saturday, February 24

प्रसन्नता और खुशहाली के सुख सागर में वही गोते लगा रहा है जो अहम और कर्ज से है मुक्त

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tazzaजीवन में हर व्यक्ति परिस्थितियां कैसे भी हो हर संभव सुखी खुशहाल और निरोगी रहने की कामना करने के साथ साथ ऐसा प्रयास भी करता है। मगर समय कोई सा भी हो औरो की सुख सुविधा प्रगति व तरक्की देख वो भी इस श्रेणी में शामिल होने की अभिलाशा करते हुए बिना सोचे समझे उधार और दूसरों के एहसान लेने के चक्रव्यूह में ऐसा फंसता है कि साधारण परिस्थितियों में भी जो सुख सुविधा शांति तथा अच्छा स्वास्थ उसके पास था वो भी चला जाता है। और धीरे धीरे ये उधार देने और मदद के नाम पर एहसान करने वाले उसे अपने लेन देन के शिकंजे में इतना जकड़ लेते है कि उसकी रातों की नींद तो उड़ती ही है लिया गया धन वापस करने की चिन्ता में वो बीमार होने के साथ साथ ऐसी अनेकों कठिनाईयां मोल ले लेता है जिसका समाधान आसानी से होना संभव नहीं होता है।
भगवान ने हमें जो बहुमूल्य मानव जीवन दिया उसमें अच्छी सोच अपनाकर आगे चलने और पूरा जीवन प्रकाशमय तथा खुशहाल बनाने के लिए सीमित साधनों में प्रसंन्न रहने की जो सोच दी जब हम उसे छोड़कर ऋण देने वालों की वाकपुठता की मीठे सपनों की चाल में फंसते है तो हमारे जीवन में उजाले के स्थान पर अंधकार का जो प्रवेश होता है वो हमें ना जीने देता है और न मरने।
दोस्तों वैसे तो ये प्रेरणा महापुरूष ही देने में समक्ष होते है और मैं न तो कोई इस श्रेणी का व्यक्ति हूं और ना ही मेरे में ऐसा कोई गुण जो लोग मुझसे प्रेरणा ले सके लेकिन जीवन की जो कठिन डगर पार करते हुए आज जिस स्तर पर भगवान की मेहरबानी और सही मायनों में अपनों के सहयोग से जहां मैं बैठा हूं उससे जो खट्टे मीठे तजुर्बे हुए उसके आधार पर ये जरूर कह सकता हूं कि अगर सम्मान से जीना है तो आधी रोटी खाकर ठंडा पानी पीने वाली कहावत को समयानुसार आत्मसात करना होगा। क्योंकि कारण कोई भी हो सब्जबाग दिखाने वाले कभी अपने नहीं हो सकते। इसलिए देख पराई चुपड़ी मत ललचाये जी पर चलने का अटल निश्चित जिस दिन हम कर लेंगे धीरे धीरे हमारे जीवन से हर प्रकार का अंधेरा और कष्ट दूर होगे। इसलिए दोस्तों सुखी वाही है जो किसी का भी कर्जदार नहीं है लेकिन कहते है कि माता पिता और भगवान का कर्ज जीवन में कोई नहीं उतार सकता। तो आओ सच्चे मन से माता पिता की सेवा और परम पिता परमात्मा के दिखाये मार्ग पर चलते हुए ये संकल्प ले कि कभी भी अहम को अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगे उधार लेने से दूर रहेंगे और अच्छे दोस्त गुणवत्ता के आधार पर तय कर मुख में राम बगल में छुर्रियां वाले दोस्तों से दूरी बनायेंगे। और जिस दिन हम ऐसा कर लेंगे और अहम तथा कर्ज से मुक्त होंगे। उसके बाद हमसे ज्यादा सुखी इंसान ढूंढने से भी नहीं मिलेगा। ये बात मैं अपने जीवन में आये उतार चढ़ाव अमीरी गरीबी के अनुभवों और अपनों के द्वारा अपनाये गये दृष्टिकोण को देखकर विश्वास से कह सकता हूं कि ग्रामीण कहावत दस नादान दोस्त से एक अच्छा दुश्मन भला। को अपनाये और प्रभू का गुणगान करते हुए मेहनत के दम पर आगे बढ़े। कभी किसी मजबूर गरीब और सच्चे दोस्त को न सताये और फिर आप देखिए कि धन संपदा कम होने के बाद भी आपका जीवन जब मानसिक परेशानियों से दूर होगा तो निरोगी खुशहाल और संपन्ता से परिपूर्ण होगा।

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