Sunday, June 23

पश्चिम से मोदी सरकार में नजर आ सकते हैं दो मंत्री

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मेरठ 08 जून (प्र)। मोदी सरकार – 3 में मंत्रियों के नामों को लेकर हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश में आधी सीटों पर सिमटी भाजपा मंत्रियों के चयन में फूंक फूंककर कदम बढ़ाएगी। जातीय समीकरण साधने के साथ मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने पर जोर होगा। पश्चिम क्षेत्र में एनडीए ने 14 में से सात सीटों पर जीत दर्ज की है, जिसमें राष्ट्रीय लोकदल के दो सांसद हैं। माना जा रहा है कि पश्चिम और ब्रज से मिलाकर पार्टी एक-एक ब्राह्मण, जाट एवं गुर्जर चेहरे को मंत्री बना सकती है। उधर, नगीना सुरक्षित सीट पर हैरतअंगेज जीत दर्ज करने वाले युवा दलित नेता चंद्रशेखर की काट में पार्टी शाहजहांपुर से दूसरी बार जीते अरुण सागर को मंत्री बनाकर दलित खासकर जाटव वोटों को साधने का प्रयास करेगी।

जयन्त का मंत्री बनना लगभग तय
2024 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा से हाथ मिलाने वाले रालोद अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य जयन्त चौधरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने की संभावना सर्वाधिक है। चौ. चरण सिंह की राजनीतिक विरासत के सारथी जयन्त के जरिए एनडीए जहां पश्चिम यूपी, हरियाणा और राजस्थान तक जाट समीकरण दुरुस्त रखने का प्रयास करेगा। 2014 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब पश्चिम उप्र से किसी जाट नेता का नाम मंत्रिमंडल में चर्चा में नहीं आया । जयन्त को कृषि मंत्रालय देने की भी चर्चा चली है। इससे पहले मुजफ्फरनगर सांसद डा. संजीव बालियान 2014 और 2019 की सरकारों में मंत्री बनाए गए थे। बीच में उनकी जगह बागपत सांसद डा. सत्यपाल सिंह भी मंत्री बने थे।

डा. महेश शर्मा और डा. लक्ष्मीकान्त पर चर्चा
पश्चिम क्षेत्र में भाजपा के अरुण गोविल ने मेरठ-हापुड़, अतुल गर्ग ने गाजियाबाद, डा. महेश शर्मा ने गौतमबुद्धनगर और कंवर सिंह तंवर ने अमरोहा में जीत दर्ज की है। डा. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी और सुरेंद्र नागर राज्यसभा सदस्य हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. महेश शर्मा को दोबारा मंत्री बनाने की चर्चा ज्यादा है। संगठन में लंबा अनुभव रखने वाले व अनुभवी ब्राह्मण चेहरा डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी के रूप में मेरठ को प्रतिनिधित्व मिल सकता है। वहीं, पार्टी में नए चेहरों के जरिए भविष्य की राजनीति गढ़ने के पक्षकारों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का नाम आगे किया है। गुर्जर चेहरा व राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर ने हरियाणा में चुनाव का प्रभार संभालने के साथ ही गुर्जर बहुल सीटों पर पार्टी का प्रचार किया। उनका दिल्ली में भी बेहतर कनेक्शन है। वहीं अमरोहा की कड़ी सीट से 2014 के बाद एक बार फिर जीतकर संसद पहुंचे गुर्जर चेहरा कंवर सिंह तंवर अपने दिल्ली में मजबूत रिश्तों के जरिए रेस में हैं।

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