धार्मिक और स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि से जुड़े मेरठ शहर में आए दिन अतिक्रमण हटाओ और नगर को जाम मुक्त बनाने के अभियान के लिए बैठकें भी होती है और पुलिस फोर्स के साथ नगर निगम कैंट बोर्ड और आवास विकास के अधिकारी अभियान चलाते हैं मगर ज्यो ज्यो दवा की मरज बढ़ता गया कहावत को ध्यान में रखकर सोचें तो व्यवस्थाएं सुधरने की बजाय और खराब होती चली आ रही है।
पिछले कुछ दिनों से शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान बेगमपुल से परतापुर तक चलाए जाने की चर्चाएं सुनने को मिल रही है। इस बारे में मीडिया में फोटो भी छप रहे हैं और कुछ लोगों को इसका श्रेय भी दिया जा रहा है। इसमें कोई बुराई भी नहीं है क्यांेकि जिन क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाया जा रहा है वहां के लोगों का कहना है कि आज अतिक्रमण हटता है और कल से धीरे धीरे फिर होने लगता है। अफसरों को कुछ गिने चुने इलाके ही इस कार्य के लिए नजर आते हैं। उन्हीं में अभियान चलाने की चर्चाएं होती है। अच्छा काम कोई भी करे उसकी प्रशंसा होनी चाहिए मगर उसका असर दिखाई दे यह सबसे जरूरी बात है।
शहर की व्यवस्था बनाने वाले अफसर अगर नील की गली लाला का बाजार शहर सर्राफा कोटला सब्जी व दाल मंडी सोतीगंज जलीकोठी लालकुर्ती पैठ एरिया में भी इस प्रकार के अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाए और जाम की समस्या से आम आदमी को राहत दिलाने की कोशिश करें तो हर बार मुख्य बाजारों व मार्गो पर अतिक्रमण हटाओ अभियान से ज्यादा लाभ इन स्थानों पर अभियान से मिलेगा। यह बात नागरिकों द्वारा पूरे विश्वास से की जा रही है। मेरा मानना है कि सफाई कराने और जाम मुक्त बनाने के लिए कमिश्नर आईजी प्रमुख अधिकारियों की बैठक लें और तय समय में यह अभियान चलवाएं जाएं और वीडियो ग्राफी कराकर तीसरे चौथे दिन अधिकारियों के साथ ही थानेदार अभियान की समीक्षा करते रहें तो शहर पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान में पहले स्थान पर आ सकता है। यूपी सरकार की स्मार्ट सिटी में आने का प्रयास हो सकता है। इस अभियान में जो भी अधिकारी कर्मचारी असफल रहे उसे सजा भी दी जानी चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
कुछ स्थानों पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने से जाम मुक्त नहीं हो सकता महानगर, जलीकोठी- खैरनगर लाला का बाजार, शहर सर्राफा लालकुर्ती नील गली आदि को भी देखें अधिकारी
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