मेरठ 12 फरवरी (प्र)। राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी ने मेरठ में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापना की मांग की है। बुधवार को राज्यसभा में उन्होंने कहा कि यदि मेरठ को एम्स मिल जाए तो दिल्ली एम्स का भार कम होगा? पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोग दिल्ली न जाकर मेरठ उपचार के लिए आएंगे। उन्होंने मेडिकल में सुविधाओं का टोटा भी सभापति को गिनाया। एम्स न मिलने पर उन्हाेंने गुरुग्राम की तर्ज पर 30 बेड का एम्स का सैटेलाइट सेंटर और कैंसर इंस्टीट्यूट स्थापित करने की मांग की।
उन्होंने बताया कि मेरठ मंडल की लगभग डेढ़ करोड़, सहारपुर की लगभग 90 लाख जनसंख्या है। कहा कि यदि मेरठ में एम्स बन जाएगा तो इन मंडलों के रहने वाले दिल्ली न जाकर मेरठ ही आएंगे। उन्होंने मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज की स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया कि यह प्रदेश का सबसे पुराना सरकारी मेडिकल कॉलेज है, जहां 52 एकड़ भूमि उपलब्ध है। इसके बावजूद अस्पताल में बेड की कमी, चिकित्सकों के रिक्त पद और पुरानी मशीनों के कारण मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। उन्होंने कहा कि कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी और जटिल सर्जरी जैसे गंभीर उपचार के लिए मरीजों को दिल्ली या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
सड़क दुर्घटनाओं और हार्ट अटैक जैसे मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान समय पर उपचार न मिल पाने से जान का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि यदि पूर्ण एम्स की स्थापना तुरंत संभव न हो तो पीजीआई, एम्स का सैटेलाइट सेंटर या कैंसर इंस्टीट्यूट मेरठ में स्थापित किया जाए। इसके लिए भवन निर्माण पर लगभग 5 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है और केंद्र की सैद्धांतिक स्वीकृति आवश्यक है।
डा. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी के इस प्रस्ताव पर राज्यसभा के 45 सदस्यों ने अपनी सहमति भी जताई है और हस्ताक्षर करके सभापति को दिया है।
