मेरठ 12 फरवरी (प्र)। सेंट्रल मार्केट प्रकरण ने अब खुला आंदोलन का रूप ले लिया है। व्यापारियों ने आवास एवं विकास परिषद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आड़ लेकर चयनात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। व्यापार बचाव संघर्ष समिति के बैनर तले सेंट्रल मार्केट में आयोजित प्रेस वार्ता में व्यापारी नेताओं ने 14 फरवरी को महा आमसभा बुलाने की घोषणा की।
व्यापारी नेता सतीश गर्ग ने कहा कि परिषद के अधिकारी 661/6 परिसर में 22 दुकानों का ध्वस्तीकरण कर चुके हैं। अब पूरे सेंट्रल मार्केट को उजड़ने के लिए 15 दिन के नोटिस जारी किए जा रहे हैं, ऐसा होने नहीं देंगे। अपने व्यापार को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा देंगे। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में 90 दिन के भीतर नीति बनाकर राहत देने का विकल्प था, लेकिन अधिकारियों ने कोई ठोस नीति लागू नहीं की। उन्होंने कहा कि सेंट्रल मार्केट को बाजार स्ट्रीट घोषित करने और मिश्रित आबादी में शामिल करने का प्रस्ताव लखनऊ भेजा गया था, जिसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
व्यापारी नेता वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि आवास एवं विकास परिषद की प्रत्येक योजना में 5 प्रतिशत कमर्शियल भूमि का प्रावधान है, जबकि सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में मुश्किल से 1 प्रतिशत भूमि छोड़ी गई। पूर्व अधिकारियों की ओर से 5 प्रतिशत कमर्शियल का प्रस्ताव भेजे जाने की बात भी कही गई थी, लेकिन उस पर निर्णय नहीं हुआ। उन्होंने नई आवास नीति 2025 का हवाला देते हुए कहा कि 9 मीटर तक की सड़कों पर आवासीय भवनों में कमर्शियल उपयोग को शुल्क लेकर नियमित करने का प्रावधान है, लेकिन मेरठ में इसे लागू नहीं किया गया।
संजीव पुंडीर ने आरोप लगाया कि समान परिस्थितियों में अलग- अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने हापुड़ अड्डा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरकारी भूमि पर पुराने निमार्णों को राहत दी गई, जबकि सेंट्रल मार्केट में निजी भूमि पर वर्षों से चल रहे व्यापार को ध्वस्तीकरण की श्रेणी में लाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
समान नीति की मांग को लेकर भेजेंगे ज्ञापन
समिति ने घोषणा की कि 14 फरवरी को आयोजित आमसभा में सभी व्यापारिक संगठनों को आमंत्रित किया जाएगा। इस दौरान आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही मुख्य सचिव और आवास आयुक्त को ज्ञापन भेजकर एक समान नीति लागू करने की मांग की जाएगी।
आरटीआई कार्यकर्ता पर पक्षपात के आरोप
सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। व्यापारी नेता वीरेंद्र शर्मा ने प्रेस वार्ता में कहा कि खुराना की शिकायतों के आधार पर एकतरफा कार्रवाई कराई जा रही है, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि सेंट्रल मार्केट में वर्षों पुराने प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि हापुड़ अड्डा क्षेत्र में सरकारी भूमि पर बने पुराने निमाणों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि यदि अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाना है तो वह पूरे शहर में समान रूप से चलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2024 में इसी विषय पर दायर जनहित याचिका में न्यायालय ने करीब 60 वर्ष पुराने निर्माण को तोड़ना व्यवहारिक नहीं माना था। ऐसे में सेंट्रल मार्केट के 40- 45 वर्ष पुराने व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर सख्ती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यही नहीं व्यापारियों ने आरटीआई कार्यकर्ता पर और भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। व्यापारियों ने मुख्य सचिव, आवास आयुक्त, कमिश्नर डीएम और डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर को पत्र भेजकर समान नियम लागू करने
सेटिंग के आरोप निराधार
सेंट्रल मार्केट प्रकरण में लगाए गए आरोपों पर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने सफाई देते हुए कहा कि उन पर लगाए जा रहे सेटिंग के आरोप पूरी तरह निराधार और आपतिजनक हैं। उन्होंने कहा कि आमसभा में पूर्व पार्षद वीरेंद्र शर्मा और अन्य की ओर से दिए गए बयान तथ्यात्मक रूप से गलत है खुराना ने कहा कि वर्ष 2024 में भगत सिंह मार्केट के विरुद्ध इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में मुख्य न्यायाधीश ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि उनकी आयु 47 वर्ष है, जबकि मार्केट लगभग 60 वर्ष पुराना है, ऐसे में उसे गिराने में जनहित नहीं बनता। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में भी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय सिंह की पीठ ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी कानूनी विकल्प अपनाए। अब सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को चाहिए कि वे भी न्यायालय से भगत सिंह मार्केट के तर्ज पर राहत की मांग करें, न कि उन पर निराधार आरोप लगाएं।
अब भाजपा को वोट नहीं देंगे, लड़ाई खुद लड़ेंगे
भरोसा दिलाकर पीछे हटे जनप्रतिनिधियों से नाराज सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों ने साफ ऐलान कर दिया है कि अब वे भाजपा को वोट नहीं देंगे और अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे। व्यापार बचाव संघर्ष समिति की प्रेस वार्ता में यह स्वर खुलकर सामने आया। व्यापारियों का कहना है कि पहले उन्हें आश्वासन दिया गया था कि दुकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन अब हालात उलट नजर आ रहे हैं। समिति के संयोजक निमित जैन ने कहा कि व्यापारी लंबे समय से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के भरोसे समाधान की उम्मीद लगाए बैठे थे जब हर स्तर पर प्रयास के बाद भी राहत नहीं मिली तो अब संघर्ष ही रास्ता है। यह लड़ाई सम्मान और रोजगार की है। उन्होंने शनिवार को दोपहर 12 बजे सेंट्रल मार्केट स्थित अरोड़ा पार्क में महाआमसभा बुलाने की घोषणा की और सभी बाजारों के व्यापारियों से बाजार बंद कर बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की। प्रवीण शर्मा ने इसे पेट की लड़ाई बताते हुए कहा कि यदि दुकानें टूटीं तो बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा जब हजारों व्यापारी एक साथ खड़े होंगे, तभी सरकार और प्रशासन सुनेंगे। अब किसी के बहकावे में नहीं आना है।
चुनाव में खुलकर विरोध करेंगे
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो वे चुनाव में खुलकर विरोध करेंगे और जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार करेंगे। समिति का कहना है कि अब एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार है और 14 फरवरी की आमसभा इस आंदोलन की दिशा तय करेगी।
