मेरठ 20 फरवरी (प्र)। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बीते बुधवार को रीजनल ट्रांसपोर्ट आंफिस मेरठ पहुंचकर ट्रकों की फिटनेस और टैक्स से जुड़ी समस्याओं को लेकर विरोध जताया। एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा और महामंत्री दीपक गांधी के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने आरटीओ अनीता सिंह को ज्ञापन सौंपकर निजी फिटनेस सेंटरों की अनियमितताओं और 15 साल का टैक्स एक साथ जमा कराने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की।
ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि पहले ट्रकों की फिटनेस सरकारी विभाग द्वारा मेरठ में ही की जाती थी, जिसकी फीस करीब 1000 से 1200 रुपए थी। लेकिन अब फिटनेस का काम निजी एजेंसियों को सौंप दिया गया है, जिससे 8000 से 14000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। साथ ही मेरठ से बिजनौर तक करीब 90 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे डीजल और टोल का अतिरिक्त खर्च भी बढ़ गया है।
एसोसिएशन ने बताया कि मेरठ एनसीआर क्षेत्र में आता है, जहां नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल के आदेशानुसार डीजल वाहनों की अवधि 10 साल निर्धारित है। इसके बावजूद 15 साल का टैक्स एक साथ जमा कराने का आदेश ट्रांसपोर्टरों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है। ट्रक मालिक पहले से ही इंश्योरेंस, कागजी प्रक्रिया और अन्य खर्चों में हर साल करीब एक लाख रुपए तक खर्च कर रहे हैं।
ट्रांसपोर्टरों ने केंद्र सरकार से मांग की कि जिस प्रकार कारों के लिए एक साल का फास्टैग प्लान लागू है, उसी तरह ट्रकों के लिए भी वार्षिक योजना लागू की जाए, जिससे ट्रांसपोर्टरों को राहत मिल सके ।आरटीओ अनीता सिंह और प्रवर्तन अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टरों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इस संबंध में 23 फरवरी को आरटीओ कार्यालय में बैठक आयोजित की जाएगी।
ज्ञापन में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो ट्रांसपोर्टर अपने ट्रक आरटीओ कार्यालय में खड़े कर चाबियां जमा करने को मजबूर होंगे।
