मेरठ 24 फरवरी (प्र)। सेंट्रल मार्केट प्रकरण में अवैध निर्माण पर कार्रवाई की घड़ी आ चुकी है, लेकिन पुलिस फोर्स न मिलने से बुलडोजर की कार्रवाई फिलहाल टल गई है। आवास एवं विकास परिषद की ओर से जारी नोटिस की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। मंगलवार से ध्वस्तीकरण शुरू होना था, मगर पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण अभियान आगे नहीं बढ़ सका । मामला शास्त्री नगर, जागृति विहार और माधवपुरम योजना का है, जहां रेजिडेंशियल भूखंडों पर कमर्शियल गतिविधियां संचालित हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के 27 जनवरी के आदेश के बाद 729 रिहायशी परिसरों में चल रही व्यावसायिक दुकानों को चिन्हित किया गया। परिषद की टीम ने जहां-जहां ध्वस्तीकरण होना है, वहां लाल रंग से क्रॉस के निशान लगा दिए हैं। व्यापारियों को पहले ही नोटिस जारी कर दुकानें खाली करने को कहा गया था, लेकिन अधिकांश स्थानों पर अभी तक कब्जा बरकरार है। इससे क्षेत्र में असमंजस और चिंता का माहौल है।
आज एसएसपी से मिलेंगे परिषद के अधिकारी
आवास एवं विकास परिषद के अधिशासी अभियंता अभिषेक राज ने बताया कि 24 फरवरी से कार्रवाई प्रस्तावित थी। पुलिस फोर्स नहीं मिलने के कारण इसे स्थगित करना पड़ा। अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे से मुलाकात कर पर्याप्त बल की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन अनिवार्य है। फोर्स मिलते ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू करेगी।
कार्रवाई से पहले चीफ इंजीनियर का निरीक्षण
आवास एवं विकास परिषद की संभावित कार्रवाई से पहले लखनऊ से आए चीफ इंजीनियर डीवी सिंह ने मेरठ में विभिन्न निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता को लेकर दिशा-निर्देश भी दिए। हालांकि परिषद सूत्रों का कहना है कि उनका दौरा नियमित निरीक्षण के तहत था। सेंट्रल मार्केट प्रकरण से इसका सीधा संबंध नहीं है। बताया गया कि जागृति विहार में बन रहे एक आवासीय भवन के निर्माण का निरीक्षण करने वे आए थे। निरीक्षण को लेकर बाजार में चल रही चर्चाओं को अधिकारियों ने निराधार बताया।
सेंट्रल मार्केट पर मंडराता खतरा, संगठन ने खोला मोर्चा
729 दुकानों पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण से पहले सेंट्रल मार्केट का विवाद अब कानूनी मोड़ लेता नजर आ रहा है। आवास एवं विकास परिषद की कार्रवाई की तैयारी के बीच सामाजिक संगठन और व्यापारी खुलकर सामने आ गए जागृति विहार स्थित किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष महानगर कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में एविडेंस गुरुकुल फाउंडेशन पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने शास्त्री नगर निवासी एवं आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना को लीगल नोटिस भेजा है, जिसमें विभिन्न कानूनी बिंदुओं पर जवाब और साक्ष्य मांगे गए हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि संबंधित आरटीआई कार्यकर्ता व्यापारियों को आर्थिक, मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। लगातार दबाव बनाकर उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर कर रहे हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि पिछले कई वर्षों से आवास एवं विकास परिषद के कुछ अधिकारी पूर्ण रूप से भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं और उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई नोटिस की प्रतिलिपि सीएम, एडीजी मेरठ जोन और डीएम मेरठ को भी भेजी गई है, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो सके संगठन ने चेतावनी दी है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे कानूनी कदम उठाए जाएंगे। उधर, बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। एक ओर प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन की बात कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, संगठन कानूनी चुनौती देकर कार्रवाई को रोकने की तैयारी में है।
मेरा निशाना परिषद, व्यापारी नहीं
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने आज तक किसी व्यापारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और न ही किसी दुकान या कॉम्प्लेक्स से उनका व्यक्तिगत लेना-देना है। उनका कहना है कि उनका मुद्दा केवल आवास एवं विकास परिषद की कार्यप्रणाली से जुड़ा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ध्वस्तीकरण का मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आधारित है। यदि किसी व्यापारी आपत्ति है तो वह अपनी बात सीधे सुप्रीम कोर्ट में रखे।
