मेरठ 09 मार्च (प्र)। स्कूलों को दुकान और कामर्शियल गतिविधियों का केंद्र मानकर ध्वस्तीकरण के नोटिस दिए जाने के विरोध में शास्त्रीनगर के स्कूल संचालकों ने आवास एवं विकास परिषद के कार्यालय में प्रदर्शन किया।
आल इंडिया स्कूल लीडर्स एसोसिएशन के बैनर तले स्कूलों के चेयरमैन, डायरेक्टर्स, प्रधानाचार्य और स्टाफ के लोग उप आवास आयुक्त कार्यालय पहुंचे। एसोसिएशन के अध्यक्ष कवलजीत सिंह ने बताया कि परिषद द्वारा भेजे गए नोटिस से विद्यार्थियों और अभिभावकों में गलत संदेश जा रहा है। बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं। वह भी इस तरह के नोटिस से चिंतित हैं। कहा कार्रवाई हुई तो बड़ी संख्या में स्टाफ की नौकरी का संकट हो जाएगा। एक विद्यालय में औसतन 200 छात्रों के अलावा शिक्षकों समेत 30 से 40 लोगों का स्टाफ है।
कंवलजीत ने बताया कि स्कूलों के लिए ‘दुकान’ शब्द प्रयोग करना तथ्यात्मक रूप से गलत है। भारत के सभी स्कूल ट्रस्ट या सोसाइटी के अंतर्गत संचालित होते हैं, जो समाज सेवा और शिक्षा के उद्देश्य से स्थापित किए जाते हैं। राज्य सरकार द्वारा स्कूलों को मान्यता दी जाती है। मान्यता की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख होता है कि स्कूल किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं करेंगे। उनका उद्देश्य केवल शैक्षिक गतिविधियां चलाना होगा। स्कूलों को व्यवसायिक संस्था मानना पूरी तरह विरोधाभासी और अनुचित है। स्कूलों को बिजली कनेक्शन भी विशेष श्रेणी के दिए जाते हैं। स्कूलों में गरीब बच्चों को भी निश्शुल्क शिक्षा दी जाती है। किसी भी प्रकार के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न करने के लिए ज्ञापन दिया। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने कहा कि मानचित्र के विपरीत बने निर्माणों को नोटिस दिया गया है। नियमानुसार सेटबैक हटाना होगा।
