मेरठ 09 मार्च (प्र)। दिल्ली- मेरठ एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण का कार्य दो साल की देरी के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों के धरने के कारण पिछले साल दिसंबर से काम रुका है। कब तक काम शुरू होगा, इसका कोई ठोस जवाब भी नहीं मिल पा रहा है। बहरहाल यदि इस महीने ग्रामीणों की मांग पर आश्वासन देने के बाद काम शुरू हो जाए तो भी सात-आठ महीने इसे पूर्ण होने में लगेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रवेश व निकास वाले दोनों प्रमुख इंटरचेंज अभी नहीं बन सके हैं।
14 किमी के एक्सप्रेसवे यानी कनेक्टर को मार्च 2024 में पूर्ण किया जाना था। नया लक्ष्य मार्च 2026 रखा गया था। अगर अभी भी तेजी से कार्य हुआ तो अक्टूबर तक काम पूर्ण हो पाएगा। चार लेन का यह कनेक्टर हापुड़ हाईवे पर लोहियानगर डंपिंग ग्राउंड के नजदीक से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के चौथे चरण (डासना- परतापुर खंड) में जैनुद्दीनपुर में जुड़ेगा। लोहियानगर डंपिंग ग्राउंड यानी शकरपुर के पास इंटरचेंज बनना है। इसके लिए अभी ढांचा तैयार नहीं है। हापुड़ हाईवे के एक तरफ ही पिलर तैयार है, जब दूसरी तरफ पिलर तैयार होंगे तब गर्डर रखे जाएंगे। लगातार आवागमन के कारण गर्डर रखने में समय लगेगा। किसी भी रैंप के लिए अभी मिट्टी भराव नहीं हुआ है। दूसरा इंटरचेंज जैनुद्दीनपुर में बनना है। यह दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के चौथे चरण से जोड़ेगा। इस इंटरचेंज के लिए अंडरपास तैयार हो गया है। पुल पर गर्डर रखे जा चुके हैं। अभी अंडरपास व पुल को जोड़ने के लिए मिट्टी भराव व डामर कार्य बाकी है। रैंप का काम भी अधूरा है।
चुड़ियाला में भी काम पूर्ण नहीं
मोहिउद्दीनपुर- खरखौदा चुड़ियाला के पास पहले पुल बनाकर उतार-चढ़ाव देने की मांग को लेकर किसानों ने एक साल तक धरना दिया था, जिससे उक्त स्थान पर निर्माण कार्य रुका रहा। मांग मान ली गई। पिलर बनने के बाद भी देरी होती रही। पड़ताल में सामने आया कि इसके लिए गर्डर तो रख लिए गए हैं लेकिन दोनों तरफ आरई बाल बनाकर मिट्टी का भराव नहीं हो पाया है।
किसानों की प्रमुख मांगें
तलहटा-जैनुद्दीनपुर गांव में निर्माणाधीन इंटरचेंज पर आसपास के गांवों के लिए उतार-चढ़ाव का रैंप बनाया जाए। जिस तरह से चुडियाला में खरखौदा मोहिउद्दीनपुर मार्ग पर बनाया जा रहा है।
सभी किसानों को समान मुआवजा दिया जाए। खेत तक जाने के लिए सर्विस रोड बनाई जाए। जिन खेतों से मिट्टी ली गई है, उसके किसान को भुगतान किया जाए।
ग्रामीण बोले, ठेकेदारों ने बहुत किया परेशान
भाकियू की अगुवाई में तलहटा समेत कई गांवों के लोग धरने पर बैठे हैं। कार्य रुकवा रखा है। यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष कुलदीप त्यागी व अन्य किसानों का कहना हैं कि आसपास हाईवे व एक्सप्रेसवे पहले भी बने लेकिन इतनी मनमानी नहीं हुई। इसके ठेकेदार ने बहुत परेशान किया। चकरोड खत्म कर दिया लेकिन कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं दिया। खेतों से मिट्टी उठा लाए लेकिन भुगतान नहीं किया। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ-साथ सर्विस रोड बनाई गई है लेकिन इस एक्सप्रेसवे के किनारे खेत तक जाने का रास्ता भी बंद कर दिया है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे परियोजना निदेशक अरविंद कुमार का कहना है कि जिला प्रशासन की सहायता से समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों से वार्ता का जल्द हल निकलेगा, जिसके बाद काम शुरू हो जाएगा। 75 प्रतिशत काम हो चुका है। जून तक कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
