Monday, March 9

अपने हितों में आंदोलन करने की चेतावनी… स्कूल वाले बताये कि बच्चों को क्या क्या सुविधाएं दे रहे हैं और अभिभावकों के सम्मान के लिए क्या करते हैं, रिहायशी भूमि में क्यों खोले गये हैं स्कूल

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मेरठ, 09 मार्च (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। शास्त्री नगर क्षेत्र में स्थित स्कूलों को ध्वस्तीकरण के भेजे गये नोटिसों को पूरी तौर पर गैर कानूनी और शिक्षा विरोधी नियमों के विपरीत बताते हुए ऑल इंडिया स्कूल लीडरर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष कंवल जीत सिंह के नेतृत्व में आवास विकास के अधिकारियों को ज्ञापन देकर चेतावनी दी कि अनावश्यक प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखा जाए और अगर शिक्षा स्थलों और संस्थानों के साथ इस प्रकार का व्यवहार जारी रहा तो प्रदेश भर के स्कूलों के साथ मिलकर व्यपाक स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा। अपने लोकतांत्रिक देश में हर किसी को अपनी बात कहने और सुनने का पूर्ण अधिकार है शायद इसी के तहत 25-30 स्कूलों के चेयरमैन, डायरेक्टर, प्रिंसिपल व स्टाप के सदस्यों ने अपने स्कूल की गाड़ियों के साथ आवास विकास कार्यालय पहुंचकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने स्कूलों को भेजे गये ध्वस्तीकरण नोटिस को गैर कानूनी और शिक्षा व नियम विपरीत बताते हुए वापस लेने की मांग की। इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना था कि स्कूलों को व्यवसायिक गतिविधियों के रूप में देखना तथ्यात्मक रूप से गलत है। मौजूदा कानून व सरकारी नीतियों के भी विरूध है उनका कहना था कि देश के सभी स्कूल ट्रस्ट व सोसायटी के अंतर्गत संचालित होते हैं और यह समाजसेवा और शिक्षा के उद्देश्यों से स्थापित किये जाते हैं इसलिए ऐसे संस्थानों को आयकर अधिनियम 12 ए के अंतर्गत पंजीकरण दिया जाता हैं। यह स्कूल नौ प्रोफिट नौ लॉस के आधार पर संचालित होते हैं इनका उद्देश्य सेवा तथा शिक्षा चेरीटेबल गतिविधियां होती हैं। इसलिए स्कूलों को व्यवसायिक संस्थान मानना पूरी तौर पर गलत है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के बिजली कनेक्शन भी एलएमबी चार श्रेणी में दिये जाते है जो विशेष रूप से स्कूल-कॉलेजों के लिए निर्धारित हैं।

ऑल इंडिया स्कूल लीडरर्स एसोसिएशन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष कंवल जीत सिंह की बात उनके हिसाब से सही है लेकिन इनके ज्ञापन देने और इन्होंने जो जो कहा उसको पढ़कर कितने ही अभिभावकों का कहना था कि स्कूलों को मिलने वाले लाभ तो उन्होंने बता दिये इनके लिए जो नियम कानून निर्धारित हैं उनका उल्लेख कहीं नहीं किया गया। एक अभिभावक का कहना है कि शिक्षा के लिए अलग से भूमि निर्धारित होती है लेकिन शास्त्री नगर क्षेत्र में ज्यादातर रिहायशी भवनों में किये गये अवैध निर्माण आदि में चल रहे हैं इसलिए अगर व्यवसायिक संस्था मानकर नोटिस दिये गये तो बुराई ही क्या है स्कूल संचालक निर्धारित नियमों का भी पालन करें। एक अन्य अभिभावक का कहना था कि सेवा के नाम पर संचालित शिक्षा के मंदिरों को अनकहे रूप में मोटा मुनाफा कमाने वाली दुकान बनाये जाने वाली बात को नकारा नहीं जा सकता। यह बताये कि अपने स्कूल में कितने बच्चें फ्री पढ़ा रहे हैं और कितने बच्चों को किताबें आदि सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं तथा स्कूल खोलने से पहले जमीन का लैंड यूज बदलवाया या नहीं। तथा जो भुगतान किया जाता है वह कराया या नहीं केवल यह कह देने से कि यह चौरिटेबल गतिविधियां करते हैं ट्रस्ट और सोसायटियों जिनके माध्यम से इन स्कूलों को चलाये जाने की बात कहीं जा रही है एक बार स्कूल संचालन ट्रस्ट बनाते और सोसायटी रजिस्टर्ड कराते जो संविधान बनाया गया था उसको भी पढ़कर देख लें कि क्या जो सुविधाएं बच्चों को देने की बात की जा रही है उसका 10 या 20 प्रतिशत भी दे रहे है क्या। मेरा भी मानना है कि अगर यह शिक्षा की दुकान नहीं है तो पहले तो जो अवैध निर्माण किये गये हैं उन्हें हटाये कुछ स्कूलों ने जो सरकारी जमीन विभिन्न रूपों में घेरी है उन्हें खाली करें और उन पर बने निर्माण तोड़ें तथा छात्रों और स्कूलों में आने वाले अभिभावकों को सम्मान देने के लिए इनके यहां क्या सुविधाएं की गयी है वह बताये क्योंकि देखने में आता है कि कई स्कूल जब एडमिशन होते हैं तो अभिभावकों को सड़क पर खड़ा कर देते हैं और कई तो गेट बंद कर देते है। ना तो अभिभावकों को पानी और न बैठने की व्यवस्था होती यह कौन सी सेवा दे रहे हैं ज्यादातर स्कूल। कोई आंकड़े नहीं है मगर कई स्कूल तो जिन नामों पर फीस लेते हैं वह सुविधा पूर्ण रूप से फीस लेते समय जो बताये जाते हैं वह नहीं होती इसलिए स्कूल कौन सी सेवा के तहत अभिभावकों को क्या सुविधा दे रहे हैं और बच्चांे की अच्छी पढ़ाई के लिए क्या क्या कर रहे हैं कहने का मतलब यह है कि सुविधाएं मांगने और अपने अधिकार बताने से पहले अभिभवक और बच्चों को वह सभी सुविधाएं देनी शुरू की जाये जिनके वह पात्र हैं।
क्योंकि कितने ही स्कूल कुछ वीआईपी को बुलाकर उसका प्रचार-प्रसार कर तथा अपने स्कूल के रिजल्ट महत्वपूर्ण बताकर अपना महिमामंडन करने में लगे रहते हैं लेकिन ऐसे स्कूल यह नहीं बताते कि वह अपने यहां एडमीशन कितने नंबर वाले बच्चों को लेते है। अगर 70 प्रतिशत नंबर वाले बच्चों को ंएडमीशन देकर अपनी वाह-वाही लूटते हैं तो वह सही नहीं कह सकते क्योंकि 40-50 प्रतिशत लाने वाले बच्चों को एडमीशन देकर उन्हें 80प्रतिशत पहुंचाकर अपने रिजल्ट का गुणगान करें तो ठीक है वरना यह आंदोलन की चेतावनी शायद किसी पर कोई असर नहीं डाल पाये क्योंकि पहले भी ऐसे आंदोलन कई क्षेत्रों में होते रहे हैं।

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