Monday, March 23

उत्कर्ष मालिक ने 150 रुपये में बनाया वायरलेस ईवी चार्जर

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मेरठ 23 मार्च (प्र)। 10 दिवसीय विज्ञान घर कार्यक्रम में ग्रेटर नोएडा के पास स्थित छायसा गांव के 15 वर्षीय छात्र उत्कर्ष मालिक ने अपनी प्रतिभा और नवाचार से एक नई मिसाल कायम की है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले उत्कर्ष ने यह साबित कर दिया कि यदि सोच बड़ी हो तो सीमित संसाधन भी बड़ी उपलब्धियों का रास्ता बन सकते हैं। मार्च 2024 में उनका बनाया गया प्रोजेक्ट न केवल चर्चा का विषय बना, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिलाई उत्कर्ष ने एक ऐसा वायरलेस इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर तैयार किया, जिसे बनाने में मात्र 150 का खर्च आया। जहां आमतौर पर इस प्रकार की तकनीकों पर हजारों रुपये खर्च होते हैं, वहीं उत्कर्ष बेहद कम लागत में यह मॉडल तैयार कर सबको चौंका दिया। यह चार्जर बिना तार के काम करता है और आधुनिक तकनीक का सरल रूप प्रस्तुत करता है। उत्कर्ष का यह प्रोजेक्ट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें बिजली को बिना सीधे संपर्क के एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक पहुंचाया जाता है। जब चार्जिंग प्लेट और वाहन के बीच ऊर्जा का संचार होता है, तो बिना केवल के ही बैटरी चार्ज हो जाती है। यह तकनीक भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

मिली बड़ी पहचान
उत्कर्ष की इस उपलब्धि को तब और बड़ी पहचान मिली, जब उनके प्रोजेक्ट का चयन नासा ह्यूमन एक्सप्लोरेशन रोवर चैलेंज के लिए किया गया। यह प्रतियोगिता विश्व स्तर पर आयोजित होती है, जिसमें विभिन्न देशों के छात्र अपने वैज्ञानिक और तकनीकी मॉडल प्रस्तुत करते हैं। इस चयन ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय ग्रामीण प्रतिभाएँ भी वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ सकती हैं। उत्कर्ष की सफलता इस बात का उदाहरण है कि नवाचार केवल बड़े संसाधनों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सोच और जिज्ञासा पर आधारित होता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत
विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित किया जाए, तो भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग प्रक्रिया पूरी तरह बदल सकती है। पार्किंग स्थल पर बिना तार के चार्जिंग, सड़कों पर वायरलेस चार्जिंग सिस्टम और ऊर्जा के बेहतर उपयोग जैसी संभावनाएं इस तकनीक से जुड़ी हुई हैं। उत्कर्ष मलिक की यह उपलब्धि देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और सही दिशा में मेहनत की आवश्यकता होती है।

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