मेरठ 23 मार्च (दैनिक केसर खुशबू टाइम्स)। कलेक्ट्रेट में होलसेलर एण्ड रिटेलर केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने प्रदर्शन कर कहा कि हम नशे का कारोबार नहीं करते हैं। हम दवाई बेचते हैं, जिससे लोगों की जिन्दगी बचती है। उत्तर प्रदेश में करीब 2.5 लाख लाईसेंस दारी दवा विक्रेता है और प्रत्येक दवा की दुकान से करीब पाँच परिवार जुड़े हैं, जिससे उनका घर चलता है। अभी एफडीए विभाग की प्रमुख सचिव रोशन जैकब ने लाईसेंस की जांच का आदेश पूरे उत्तर प्रदेश में दिया है, जिससे ड्रग विभाग के अधिकारियों के साथ नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी भी बाजारों में जा रहे हें तथा सत्यापन के नाम पर जमकर उत्पीड़न हो रहा है ।प्रत्येक पांच वर्ष में ड्रग लाईसेंस का सत्यापन होता है तथा विभाग के द्वारा व्यापारी से दुकान से सम्बन्धित सभी दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करवाये जाते हैं, फिर जांच करके लाईसेंस का नवीनीकरण होता है फिर जांच के नाम पर भष्ट्राचार व उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।
शैड्यूल के अन्तर्गत आने वाली दवाई कम्पनी बनाती है । यह दवाईयां दवा विक्रेता के पास बिल से आती है और बिल से बिकती है फिर भी दवा विक्रेता के साथ अपराधी जैसा व्यवहार क्यों हो रहा है । एक दो पत्तों के लिए दवा व्यापारी का नारकोटिक्स के नाम पर उत्पीड़न तथा जेल जाना उचित नहीं है ।
यह दवाईयां 95 प्रतिशत मरीजों की बिमारी में काम आती है। जैसे, माईग्रेन, डिप्रेशन, आपरेशन, हार्ट, ट्रोमा आदि, इनके बिना इलाज संभव नहीं है। फिर भी सरकार को यदि यह महसूस हो रहा है कि ये दवाईयां नशे के प्रयोग में हो रही है। तो सरकार को इनको कम्पनी स्तर से बन्द करा दें। लेकिन जांच के नाम पर नारकोटिक्स विभाग, पुलिस विभाग का दवा विक्रेता के यहां दखल नहीं होने चाहिए।
नारकोटिक्स के अन्तर्गत आने वाली दवाई सरकारी नियन्त्रण में बिकनी चाहिए तथा इन दवाई को बेचने वाला व्यक्ति भी सरकारी होना चाहिए। जिससे इनके दुरुपयोग की संभावना शून्य हो जायेगी।
ड्रग विभाग एक बहुत बड़ा विभाग है और दवा व्यापारियों की लगातार जांच करता है फिर अन्य विभागों की जरूरत क्यों है । इसलिए ड्रग विभाग की समीक्षा की बहुत अधिक आवश्यकता है और ड्रग विभाग के पास ष्टत्र नम्बर भी नहीं है। इसलिए विभाग के अधिकारियों के पास सरकारी नं0 का होना जरूरी है।
रिहायशी इलाकों में लाईसेंस विभाग द्वारा ही प्रदान किये गये थे। उनके निरस्त होने से लाखों लोग बेरोजगार हो जायेंगे । रजिस्टर्ड रेट एग्रीमेंट एक जटिलता का विषय है। कई दुकान मालिक ऐसे हैं जो रजिस्टर्ड किरायानामा कराना नहीं चाहते हैं और कुछ दुकानदारों का किरायानामा 30-40 साल पुराना है। ऐसा नियम लागू करने से हजारों दुकाने बंद हो जायेंगी। आज सरकार आसानी से व्यापार बढ़ाने की बात कर रही है, लेकिन विभाग सत्यापन के नाम पर दुकाने बंद कराना चाहता है ।
कलेक्ट्रेट में होलसेलर एण्ड रिटेलर केमिस्ट एसोसिएशन का प्रदर्शन
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