मेरठ 23 मार्च (प्र)। सेंट्रल मार्केट में अब संघर्ष सड़कों से निकलकर अदालत की चौखट तक पहुंचने जा रहा है। उजड़ते कारोबार और अनदेखी से आहत छोटे व्यापारियों ने निर्णायक कदम उठाते हुए अलग राह पकड़ ली है। सेंट्रल मार्केट प्रकरण में अब नया मोड़ आ गया है। छोटे व्यापारियों ने बड़े कारोबारियों और संगठन से अलग रास्ता चुनते हुए पुनर्वास के मुद्दे पर कोर्ट जाने का फैसला कर लिया है। बैठक में यह भी तय हुआ कि वे अब मौजूदा संगठन को समर्थन नहीं देंगे, जिससे विवाद और गहराने के आसार हैं।
दो दिन पहले हुई एक गोपनीय बैठक में छोटे व्यापारियों ने बड़ा फैसला लेते हुए सेंट्रल मार्केट व्यापार संघ से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया। व्यापारियों का आरोप है कि शासन से राहत भरे आए करीब 80 पत्रों में बड़े व्यापारियों को उपयोग परिवर्तन (चेंज ऑफ लैंड यूज) की अनुमति की प्राथमिकता दी गई है, जबकि छोटे व्यापारियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। अधिकांश नाम बड़े व्यापारियों के हैं, जबकि छोटे दुकानदारों का कहीं जिक्र तक नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि 12 मीटर सड़क का आधार बनाकर उनके आवेदन खारिज कर दिए गए, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिल पा रही। सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब बिल्डिंग बायलॉज पॉलिसी का लाभ ही नहीं मिलना था, तो ऐसी नीति का क्या मतलब? छोटे व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि केवल बड़े व्यापारियों के बीच ही सक्रिय हैं, जबकि छोटे दुकानदारों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। दुकानें बंद हो गईं, दीवारें खड़ी कर दी गई, लेकिन कोई यह पूछने तक नहीं आया कि घर में चूल्हा जल रहा है या नहीं, एक व्यापारी ने भावुक होकर कहा।
संगठन से दूरी, कोर्ट से उम्मीद
अब छोटे व्यापारियों ने सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। वे आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों और सेंट्रल मार्केट व्यापार संगठन के खिलाफ याचिका दायर करने की तैयारी में हैं। बंद हो चुके कारोबारों की सूची भी तैयार की जा रही है। बता दें कि पहले से ही दो गुटों में बेटा सेंट्रल मार्केट अब और बिखर गया है, जिससे विवाद और गहराने के आसार है।
आज होगा ध्वस्तीकरण या टलेगी कार्रवाई?
आवास एवं विकास परिषद ने 23 मार्च, सोमवार को सेंट्रल मार्केट में संभावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई के लिए तय किया था। इसके लिए डीएम और एसएसपी को पत्र भी भेजा गया था। जैसे-जैसे कार्रवाई का दिन नजदीक आया, वैसे-वैसे व्यापारियों में चिंता बढ़ती गई। रविवार देर रात तक इस बात को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा कि आखिर सोमवार को ध्वस्तीकरण होगा या नहीं। व्यापारी पूरे दिन असमंजस की स्थिति में रहे। कुछ लोग दुकानें खोलने को लेकर भी दुविधा में दिखे, तो कई ने पहले ही तैयारी शुरू कर दी। फिलहाल, सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।
छोटे व्यापारियों की बैठक की जानकारी नहीं
सेंट्रल मार्केट व्यापार संघ के नेता सतीश गर्ग ने कहा कि सोमवार को ध्वस्तीकरण की कोई कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने बताया कि कई दुकानें पहले ही बंद हो चुकी है और फिलहाल सर्वे का काम चल रहा है। 25 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय है। छोटे व्यापारियों की बैठक पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन माना कि इस विवाद में सबसे ज्यादा
नुकसान छोटे व्यापारियों का ही हुआ है।
