मेरठ, 06 अप्रैल (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी, सरकार, शासन, न्यायालय सब मिलकर शहरों के सुनियोजित विकास के लिए प्रयासरत नजर आ रहे हैं और इस हेतु सरकारी बजट का एक बड़ा हिस्सा और दफ्तरों में कार्यरत अफसर और कमचारी और बेशकीमती समय भी खर्च हो रहा है मगर कुछ अफसरों की माल कमाने की हवस बैंक बैलेंस और सुविधाएं जुटाने की बढ़ती प्रवृति इस योजना में पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती है अपने आप तो यह कुछ करने नहीं वाले और अगर कोई संबंधित विभाग के अफसरों और माननीय मुख्यमंत्री जी के पोर्टल पर सूचना देते हैं तो उसका भी निस्तारण इनके द्वारा नक्शा पास है सही बना है या पुराना निर्माण है कहकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है और क्योंकि झूठी रिपोर्ट लगाने और मुख्यमंत्री पोर्टल पर आयी शिकायतों का फर्जी निस्तारण करने के जिम्मेदार अफसर और कर्मचारियों के विरूद्ध कोई ठोस कार्रवाई न होने से नियम तुड़वाने और सरकारी जमीन घिरवाने की प्रवृत्ति सरकारी विभाग के संबंधित अधिकारियों में बढ़ती ही जा रही है इसके जीते जागते उदाहरण के रूप में शहर और सम्पर्क मार्गों आदि का निरक्षण कर उच्चाधिकारी पता कर सकते हैं।
नया मामला आज नजर आया जिसमें बताया गया है कि परतापुर बाईपास पर बागपत जाने वाले चौराहे पर स्थित देश के नामचिन (डीपीएस) दिल्ली पब्लिक स्कूल के बराबर में एक बहुमंजिला बिल्डिंग बनती नजर आ रही है जानकारों का कहना है कि यह बिल्डिंग स्कूल कम्पाउंड में बन रही है और कुछ का कहना है कि यह स्कूल के बराबर बन नहीं है जो भी हो दोनों तरीके से ही यह नियम विरूद्ध है क्योंकि कई जानकारों का मत है कि इसका निर्माण नियम विरूद्ध मानचित्र पास बताकर किया जा रहा है। अगर स्कूल कम्पाउंड में है तो किस लिए और कैसे निर्माण नीति के विरूद्ध यह निर्माण हो रहा है और अगर स्कूल के बराबर में है तो शासन की नीति के तहत शिक्षा संस्थानों के निकट ऐसे भव्य निर्माण मंडप या कॉमर्शियल मॉल आदि नहीं हो सकते और सही क्या है गलत क्या है यह तो संबंधित विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं या निर्माणकर्ता। वैसे आसपास के कुछ सक्रिय लोगों का मौखिक रूप से कहना है कि यह निर्माण पूरी तौर पर नियम विरूद्ध है अगर अपने निस्वार्थों के तहत जोन प्रभारी एई और जेई सही प्रकार से जांच करेंगे तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी वरना तो जैसा हमेशा दो शब्द नक्शा पास अथवा निर्माण पुराना है या मानचित्र के अनुसार हो रहा है और बिना यह बताये कि कितना पास है क्या-क्या पास है और बन क्या-क्या रहा है कहकर मामले का निस्तारण कर दिया जाता है इसका भी कुछ हर्श ऐसा ही कुछ होने की बात जानकारों द्वारा कही जा रही है इसलिए और मेडा के इनसे संबंधित विभाग के अधिकारियों से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती इसलिए माननीय मुख्यमंत्री जी इस संबंध में निर्धारित नीति और नियमों का पालन करने और शहरों के सुनियोजित विकास की बात को ध्यान में रखते हुए किसी ईमानदार प्रशासनित अधिकारी की देखरेख में तकनीकी जानकारों से इसकी जांच कराई जाये।
