मेरठ 10 अप्रैल (प्र)। दौराला स्थित सेंट मेरीज एकेडमी के 50 बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले चालाक रूमान को पुलिस 40 घंटे बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। पुलिस की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इतना बड़ा हादसा करने वाले चालक के खिलाफ जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। गुरुवार को ट्रांसपोर्ट के मालिक और बस के हेल्पर को भी शांतिभंग में जेल भेजकर पुलिस ने इतिश्री कर ली।
अभिभावकों का कहना है कि हादसे की वजह से बच्चे दहशत में हैं। यही कारण रहा कि गुरुवार को प्रबंधन ने स्कूल की छुट्टी कर दी। जिन पांच बच्चों को अधिक चोट लगने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था उन्हें भी स्वजन घर ले आए। यह स्कूल तीन वर्ष पहले शुरू हुआ था। अभी कक्षा एक से छह तक की पढ़ाई होती है और इसमें 600 बच्चे हैं। मेरठ छावनी में गांधी बाग के निकट स्थित सेंट मेरीज एकेडमी से इस स्कूल का कोई संबंध नहीं है।
दौराला क्षेत्र में गांव खेड़ी टप्पा के संपर्क मार्ग पर सेंट मेरीज एकेडमी है। यहां की स्कूली बस का चालक लावड़ निवासी रूमान है। बस में जमील हेल्पर है जो बच्चों की बस में देख-रेख करता है। बस में उरला, चिंदौड़ी, लावड़ और मवीमीरा गांवों से करीब 50 बच्चे स्कूल जाते हैं। बुधवार सुबह बच्चों को लेकर चालक स्कूल जा रहा था। स्कूल से ढाई सौ मीटर पहले दौराला लावड़ मार्ग पर काली नदी के पुल पर चढ़ते समय चालक मोबाइल देखने लगा। सामने से बाइक सवार आने पर चालक का नियंत्रण स्टीयरिंग से हट गया और बस पुल से 15 फीट नीचे गिरकर पलट गई। हादसा होते ही चालक मौके से फरार हो गया। बस में सवार सभी 50 बच्चे घायल हो गए थे। काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा था। दौराला थाने में अभिभावक राहुल कौशिक ने चालक रूमान के खिलाफ शराब पीकर और मोबाइल देखते हुए लापरवाही से बस चलाने व हादसा करने का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने इतने बड़े मामले में जमानती धाराएं लगाकर खानापूरी कर दी।
थाना प्रभारी सुमन कुमार ने बताया कि ट्रांसपोर्टर आसिफ और हेल्पर जमील को गिरफ्तार कर शांतिभंग में चालान कर जेल भेज दिया। चालक रूमान की गिरफ्तारी को लावड़ में दबिश डाली गई थी। उसका मोबाइल बंद होने की वजह से रूमान से संपर्क नहीं हो सका। उसके परिवार को चेतावनी दी गई है।
यहां सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिर पुलिस अधिकारियों ने इस हादसे में गंभीरता क्यों नहीं दिखाई। इतना भारी भरकम सर्विलांस होने के बाद भी चालक का पता न लगा पाना पूरी तरह पुलिस का नकारापन ही कहा जाएगा। लोगों का कहना था कि अगर पुलिस चालक के स्वजन को हिरासत में लेती तो चालक पर दबाव बनता, लेकिन पुलिस पता न चलने का राग अलाप रही है।
सीओ प्रकाश चंद्र अग्रवाल का कहना है. कि विवेचना की जा रही है। घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया है। साक्ष्य मिलने पर विवेचना में धाराएं बढ़ा दी जाएंगी।
