Thursday, April 9

सुप्रीम कोर्ट ने किया स्पष्ट: शास्त्री नगर के 860 आवासीय भूखंडों में अब कमर्शियल गतिविधि नहीं चलेगी

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मेरठ 09 अप्रैल (प्र)। शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में सीलिंग कार्रवाई के बाद आज हुई सनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि शास्त्री नगर के 860 आवासीय भूखंडों में अब कमर्शियल गतिविधि नहीं चलेगी। इसके साथ-साथ अगले दो महीने में सभी लोगों को सेटबैक की कार्रवाई भी पूरी करनी होगी और सेटबैक के हिसाब से ही आवासीय नक्शे पास कराने होंगे। इस मामले में अब 14 जुलाई को सुनवाई होगी। आज सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ आवास विकास के अधिकरी पेश हुए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन में ये निर्माण नहीं हटाए गए, तो बुलडोजर चलेगा।

सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियां सील करने के बाद आज आवास विकास द्वारा उसकी विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की।
न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथ ने सुनवाई करते हुए 15 दिन में अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं। स्पष्ट कहा कि 15 दिन में फ्रंट के साथ ही साइड बैक भी छोड़ दें। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो 15 दिन में बुलडोजर के जरिए ध्वस्तीकरण किया जाएगा।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने 44 पूर्णतया व्यावसायिक निर्माण को सील करने के निर्देश दिए थे। इस पर बुधवार को आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह, एडीएम सिटी बृजेश सिंह की अगुवाई में टीम बनाकर सीलिंग की कार्रवाई की गई। अवमानना याचिका दाखिल करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिन में अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा शमन की धनराशि जमा करने वाले व्यापारियों को भी राहत नहीं दी। कोर्ट ने व्यापारियों को आवास एवं विकास परिषद में जमा धनराशि वापस लेने के लिए आवेदन करने की हिदायत दी है। लोकेश खुराना के मुताबिक अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए इस आदेश को केवल प्रदेश तक सीमित न रखते हुए आंखें खोलने वाला केस भी करार दिया है। इसके बाद की सुनवाई में कोर्ट द्वारा सीलिंग के बारे में तो कोई निर्णय नहीं दिया गया लेकिन आवासीय प्लॉट में चल रही कॉमर्शियल गतिविधियों को बंद कर सेटबैक की कार्रवाई करने के लिए दो महीने का समय दिया है। व्यापारियों ने आवास विकास को भू उपयोग बदलने के लिए जो 70 करोड़ रूपया श्मन शुल्क के रूप में दिया था, उसपर अब संकट आ गया है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में आवास विकास के चेयरमैन में साफ तौर पर कह दिया है कि व्यापारियों ने अपनी मर्जी से यह पैसा दिया था। अब सीलिंग की चपेट में आने वाले भी कुछ व्यापरियों ने भू उपयोग के लिए पैसा जमा करा दिया था। इसलिए अब उस पैसे का क्या होगा यह व्यापारियों के लिए बड़ा सवाल है।

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