मेरठ, 10 अप्रैल (जन)। जब तक अपने घर में आग नहीं लगती, तब तक दूसरों के जलते महलों का दर्द महसूस नहीं होता। गत दिवस मेरठ बंद में यही स्थिति देखने को मिली। शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में गत दिवस 44 भूखंडों की सीलिंग के बाद जहां पूरे मेरठ में बंद का ऐलान हुआ और बाजारों से लेकर आईएमए, जिला बार एसोसिएशन व पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन तक ने समर्थन दिया वहीं दूसरी ओर स्कूलों को लेकर अलग ही तस्वीर सामने आई। स्कूलों की सबसे बड़ी संस्था सहोदय ने सभी स्कूल खुले रखने का निर्णय लिया और अधिकांश स्कूल खुले रहे। जिसने कई सवाल खड़े कर दिए। जबकि हकीकत यह है कि मामला सिर्फ 5 स्कूलों तक सीमित नहीं है। शहर के अधिकांश स्कूल आवासीय क्षेत्रों में ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे में यह समस्या केवल कुछ संस्थानों की नहीं बल्कि पूरे शहर के शिक्षा तंत्र और हजारों बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। वही दूसरी तरफ गत दिवस सर्वाेच्च न्यायलय में स्कूलों का पक्ष सुना गया। स्कूलों का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने रखा। सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल सील हुए स्कूलों को फौरी राहत दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि जिन स्कूलों की प्रॉपर्टी सील की गई है, वह आवास विकास से समन्वय कर अपना जरूरी सामान बाहर निकाल सकते हैं। इसके साथ ही स्कूल संचालकों को निर्देश दिया गया है वह आवास विकास के साथ आवश्यक कंप्लायंस पूरा कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें ताकि डेमोलिशन की कार्रवाई से बचा जा सके।
सील हुए स्कूलों को सुप्रीम कोर्ट से फौरी राहत
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