सीबीएसई की दसवीं का परिणाम आ चुका है। सफलता बड़ी संख्या में बच्चों को मिली है। कुछ ने ५०० में से ४९७ नंबर पाकर परिवार और स्कूल का नाम बढ़ाया तो कुछ विषयों में १०० प्रतिशत अंक भी लाए। यह अपार खुशी का विषय है और हम अभिभावकों के साथ इसमें शामिल हो रहे है। कोई इंजीनियर बनना चाहता है कुछ डॉक्टर तो कोई आईएएस और आईपीएस बनने की भी सोच रहे हैं। जिस प्रकार से राजनीति में जब कोई शुरुआत दौर में शामिल होता है तो उसका सपना दरी कुर्सी बिछाने से बड़े राजनीतिक पद पर पहुंचने का होता है। ऐसे कई लोग मौजूद है जिन्होंने निचले स्तर से उठकर प्रधानमंत्री और उच्च पदों पर विराजमान होने का सौभाग्य प्राप्त किया। इसी तरह शिक्षा में हम प्री नर्सरी से बच्चों को सिखाने का काम शुरु होता है लेकिन दसवी की परीक्षा मील का पत्थर होती है क्योंकि जिसने इसे पास कर लिया तो कुछ इच्छानुसार पदों पर पहुंच जाते हैं और कुछ धीरे धीरे अपना मनोरथ हासिल करते हैं। इसलिए दसवीं की परीक्षा पास करने वालों में काबिलियत की कमी नहीं है भले ही नंबर ५० प्रतिशत आए। एक ना एक दिन यह हम होंगे कामयाब वाले गीत पर खरा उतरकर परिवार और देश की मजबूती के लिए काम करेंगे।
कई इंस्टीटयूट संचालक बच्चों को अपने यहां पढ़ना दिखाकर अपना प्रचार करते है लेकिन कई बार देखने को मिला कि जिन बच्चों की यह फोटो छपवाते हैं उनका इनसे कोई संबंध नहीं होता। जो बच्चे पास या फेल हुए वह अपने लक्ष्य पर जाने का मौका ना चूकें। कई बार कई कई प्रयास करने पड़ते हैं। किसी प्रशासनिक अधिकारी से जानेंगे तो पता चलेगा कि कभी कभी भूखे पेट ही सोना पड़ता होगा लेकिन आत्मविश्वास ने लक्ष्य की प्राप्ति कराई। इसलिए अपने लक्ष्य पर निगाह रखो सफलता मिलना पक्का है। थोडी देर भले हो जाए। पास बच्चों के अभिभावकों को बधाई और जो रह गए उनके परिवार से आग्रह है कि वह बच्चों को हतोत्साहित ना करें आगे चलकर वह पास हो इसके लिए प्रोत्साहित करें और फेल होने का ताना न दें।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
दसवीं पास छात्र करेंगे लक्ष्य प्राप्त, फेल बच्चों को हतोत्साहित ना करें
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