Thursday, May 30

सभी दल हैं तैयार तो मराठा आरक्षण में देर क्यों

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मराठा आरक्षण को लेकर पिछले कई दिन से महाराष्ट्र में जारी आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है। खबर के अनुसार एक महिला समेत अभी तक काफी लोग आत्महत्या कर चुके हैं। छत्रपत्रि संभाजीनगर में 48 घंटे की इंटरनेट सेवा मुख्यमंत्री शिंदे की शांति बनाए रखने की अपील के बाद भी बंद करनी पड़ी। 19 से 31 अक्टूबर तक 25 लोगों ने आत्महत्या की। जो संख्या 1990 के मंडल आंदोलन के दौरान की गई आत्महत्याओं के बाद सबसे ज्यादा है। बताते हैं कि दस जिलों में आंदोलन काफी हिंसक हो चुका है। मंत्री हसन की कार में तोड़फोड़ की गई। कई विधायक और सांसद अपना इस्तीफा दे चुके हैं और मराठा आरक्षण पर सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर इस मांग को मनवाने की बात कर रहे हैं। तो पूर्व सीएम अशोक चव्हाण ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है। सीएम एकनाथ शिंदे ने आंदोलनकारी मनोज जरांगे से अपील की है कि वो सरकार को कुछ समय दे जिसे मानने से उन्होंने इनकार कर दिया।
आंदोलनकारी और सरकार क्या सोचते हैं यह अलग बात है लेकिन मेरा मानना है कि इस मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे और उनके काम को मिल रहे समर्थन व सभी दलों की स्पष्ट मराठा आरक्षण लागू करने की मांग को ध्यान में रखकर अगर सोचा जाए तो अब सोचने और समझने के लिए समय देने की कोई बात ही नहीं है क्योंक नौ दिनों से आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे की मांग के बारे में सभी जाननते हैं। मीडिया में इसे लेकर खूब चर्चा हो रही है। अब तक 141 मामले दर्ज हो चुके है। 168 लोगों को गिरफतार किया गया है। उक्त जानकारी प्रदेश पुलिस कमिश्नर रजनीश सेठ द्वारा दी गई। इसलिए यह भी नहीं कह सकते हैं कि सरकार को स्थिति का ज्ञान नहीं है।
मेरा मानना है कि हिंसा को उचित नहीं कहा जा सकता लेकिन सरकार को भी जनभावनाओं का ध्यान रखकर जनहित की जरूरी मांगों पर निर्णय लेने में देर नहीं करनी चाहिए। मुझे लगता है कि महाराष्ट में कानून व्यवस्था बनी रहे और रोजमर्रा की आवश्यकता पूरी होने की व्यवस्था हो इसके लिए सरकार को उत्तराखंड आंदोलन की तरह किसी बड़ी हिंसा का इंतजार ना कर मराठा आरक्षण लागू कर इस आंदोलन को समाप्त करते हुए हर नागरिक को यह अहसास दिलाना चाहिए कि सही मांग हमेशा पूरी की जाएगी उसके लिए हिंसा या आंदोलन की आवश्यकता है। मुझे लगता है कि आंदोलनकारी मनोज जरांगे को संयम रखते हुए नागरिकों और अपने समर्थकों से हिंसा ना करने की अपील जरूर करनी चाहिए।

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