Thursday, June 13

अतुल प्रधान से न्यूटिमा प्रबंधन को पंगा पड़ सकता है महंगा, अवैध निर्माणों की जांच हो गई तो कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती है

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गढ़ रोड स्थित न्यूटिमा हॉस्पिटल मौखिक जानकारी के अनुसार अपने निर्माण और शुभारंभ से ही विवादित बताया जाता है। लेकिन जुझारू छात्र नेता रहे और अब सरधना से विधायक अतुल प्रधान से पंगा नागरिकों के अनुसार हॉस्पिटल संचालकों को महंगा पड़ सकता है। क्योंकि विधायक न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए शुरू से ही जाने जाते हैं और उनका छात्र जीवन भी संघर्षो से भरा रहा है। जहां तक बात हॉस्पिटल प्रबंधकों के निर्देश पर उनके विरूद्ध हुई एफआईआर की अतुल प्रधान के लिए यह कोई नई बात नहीं है। उनके प्रशसंकों के अनुसार पहले भी बहुत से मुकदमे जनसमस्याओं के समाधान के लिए हुए आंदोलनों के दौरान हुए। एक बीमार के बिल और दवाईयों के विवाद में न्यूटिमा गए बीते दिनों अतुल प्रधान के समर्थकों का कहना है कि मामला निपट गया था लेकिन प्रबंधन के निर्देश पर जो एफआईआर दर्ज हुई है उसके बाद जैसी खबरें पढ़ने को मिल रही हैं अतुल प्रधान आंदोलन के मूड में आ गए हैं और आप पार्टी सहित रालोद और अन्य विपक्षी दल के नेता भी जिनके समर्थक कुछ डॉक्टरों की कार्यप्रणाली से परेशान है वो भी उनके साथ खड़े हैं। आप जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी ने अतुल प्रधान के अनशन के दौरान कहा कि न्यूटिमा में भाजपा के कुछ नेताओं का पैसा लगा है और उसकी कैंटीन भी एक भाजपा नेता के बेटे संभाल रहे हैं। तो एक समाचार से पता चलता है कि अतुल प्रधान का कहना है कि न्यूटिमा में 20 बेड का नक्शा स्वीकृत है लेकिन 100 बेड की व्यवस्था बना रखी है और पार्किंग की जगह को भी काम में लिया जा रहा है। तो इनके एक समर्थक का कहना था कि शासन की नीति के विरूद्ध अस्पताल में मेडिकल स्टोर खुला है जिसके लिए इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। बताते हैं कि उप्र के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा जांच कराई जा रही है। गत दिनों इस प्रकरण को लेकर जिलाधिकारी के यहां अतुल प्रधान समर्थकों के साथ अनशन पर बैठे। लेकिन बाद में त्योहारों को ध्यान में रखते हुए और अफसरों द्वारा आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन तो समाप्त कर दिया लेकिन स्पष्ट कहा कि अस्पतालों की मनमानी नहीं चलने देंगे।
मेरा इस प्रकरण से तो कोई लेना देना नहीं है और ना ही मैं चिकित्सकों का विरोधी हूं लेकिन एक बात जरूर कह सकता हूं कि डॉक्टरी के पवित्र पेशे जिसमें सेवाभाव की शपथ लेकर हमारे अपने शामिल होते हैं वर्तमान में कुछ चिकित्सकों ने इसे माल कमाने और बड़ी बड़ी कोठिया बनाने और सुविधाएं जुटाने का माध्यम बना लिया है। इस संदर्भ में कुछ लोगों का यह कथन पूरी तौर पर सही लगता है कि कई महंगे डॉक्टर जो हर बार देखने की एक हजार रूपये के लगभग फीस लेते हैं शहर के बीचोबीच छोटी छोटी कावकनुमा दुकानों में क्लीनिक खोले बैंठे हैं और इनके कर्मचारियों द्वारा मरीजों को देखने और बैठने व अन्य सुविधाओं की बात जो सामने आती हैं उसका भी पालन नहीं किया जाता। न्यूटिमा प्रकरण में आईएमए का प्रतिनिधिमंडल सक्रिय हो गया है। बीते दिनों उन्होंने एक पत्रकार सम्मेलन भी आयोजित किया बताते हैं उसमें अपनी अपनी बात कही। मेरा बचपन से मानना रहा है कि डॉक्टर धरती पर भगवान का दूसरा रूप है ऐसी छवि पहचान रखने वाले आईएमए से संबंध डॉक्टरों को दोनों पक्षों की बात सुन मरीज के हितों और सरकार के नियमों का भी पालन अपने सदस्यों से कराना चाहिए। क्योंकि संगठन सिर्फ अपनों की कमियों पर पर्दा डालने के लिए नहीं होते। इसलिए आईएमए के पदाधिकारी कमेटी गठित करें जिसमें चापलूसों के स्थान पर ऐसे लोग शामिल किए जाएं जो साफ बात बोल सके। तब जांच कराएंगे तो पता चलेगा कि सेवाभाव की शपथ लेने वाले कई चिकित्सक कितना मानसिक आर्थिक और सामाजिक उत्पीड़न सड़कों के चौंतरों पर मरीजों को बैठाकर कर रहे है। कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि अतुल प्रधान और उनके समर्थकों द्वारा अस्पतालों के अवैध निर्माणों का जो मुददा उठाया है वो बिल्कुल सही और समयानुकुल है। क्योंकि ऐसे कुछ नर्सिग होमों की वजह से सरकार की शहरों की सौंदर्यीकरण सुनियोजित विकास की योजना तो प्रभावित हो ही रही है आए दिन जाम भी लग रहे हैं और कहीं कहीं तो इनके यहां का कूड़ा आसपास के लोगों के लिए पीड़ादायक बनता है। ऐसा कुछ पीड़ितों का कहना है।
पिछले दिनों उर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर एमएलसी विधायक और भाजपा महानगर अध्यक्ष की एक बैठक जिलाधिकारी और एसएसपी की मौजूदगी में हुई थी। उसमें भी इन अस्पतालों के अवैध निर्माण और उनसे उत्पन्न समस्याओं की चर्चा करते हुए इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। अगर संविधान अनुकूल काम होने की बात कहे तो सपा विधायक अतुल प्रधान का आंदोलन सरकार की निर्माण नीति का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ है जिसको लेकर सत्ताधारी दल के लोग भी आवाज उठा चुके हैं। जिसे देखकर यह कह सकते हैं कि भावनात्मक रूप से नागरिक अतुल प्रधान के आंदोलन के समर्थन में अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं जो कुल मिलाकर सरकार से सेवा के नाम पर सभी सुविधाएं लेने के साथ ही अवैध निर्माण में नर्सिंग होम रूपी दुकान चला रहे हैं उन्हें समझना चाहिए कि जनहित से बड़ा कुछ नहीं है। इसलिए आम आदमी के जो अधिकार है उसे सम्मान और चिकित्सा उपलब्ध कराने का काम करें ना कि इस बारे में आवाज उठाने वालों के खिलाफ एफआईआर कराई जाए।

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