Friday, March 1

बिहार के सीएम दें ध्यान, उर्दु विद्यालयों में शुक्रवार का अवकाश क्यों! ईद और बकरीद की छुटिटयां बढ़ाकर जन्माष्टमी और शिवरात्रि का अवकाश खत्म करना सही नहीं

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देश में आए दिन विभिन्न त्योहारों पर उनसे संबंध परिवारों और उनके सदस्य सरकार से अवकाश घोषित करने की मांग करते हैं। लेकिन आज एक खबर पढ़ने को मिली कि बिहार में जन्माष्टमी व शिवरात्रि की छुटटी खत्म कर सरकार द्वारा ईद और बकरीद की छुटटी बढ़ा दी गई है। अगर वाकई में यह सूचना सही है तो यह कहा जा सकता है कि राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी नीतीश कुमार से वर्तमान परिस्थितियों में ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। इससे संबंध खबर से पता चला कि शिक्षा विभाग ने सोमवार को 2024 का अवकाश तालिका जारी कर दिया है। इसमें हिंदूओं के प्रमुख त्योहार शिवरात्रि, रामनवमी, श्रावण की अंतिम सोमवारी, तीज, जिउतिया, जन्माष्टमी, अनंत चतुर्दशी, भैया दूज, गोवर्धन पूजा, गुरुनानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा के अवकाश को खत्म कर दिया गया है।
होली, दुर्गापूजा, दीवाली, छठ आदि त्योहार के अवकाश के दिनों को कम कर दिया गया है। अगले साल मुहर्रम, बकरीद, ईद की छुट्टियों के दिनों को बढ़ाया गया है। वहीं, गुरु गोविंद सिंह जयंती, रविदास जयंती व भीमराव आंबेडकर जयंती पर अवकाश घोषित किया गया है।
होली के अवकाश को तीन से दो, दुर्गापूजा के छह से तीन, दीवाली व छठ की आठ से चार दिन कर दिया गया है। वहीं, ईद पर अवकाश दो से तीन दिन, बकरीद की दो से तीन तथा मुहर्रम की एक से दो दिन कर दिया गया है।
कुल अवकाश में अंतर नहीं
2023 और 2024 में कुल अवकाश की संख्या एक समान 60 दिन है। वहीं, गर्मी की छुट्टी को 20 से बढ़कर 30 दिनों तक कर दिया गया है। गर्मी की छुट्टी 15 अप्रैल से 15 मई तक होगी। 2023 में गर्मी की छुट्टी पांच से 27 जून तक चिह्नित थी। लोकसभा चुनाव के कारण गर्मी की छुट्टी में बदलाव संभव है। शिक्षकों का कहना है कि भीषण गर्मी मध्य मई से मध्य जून तक होती है। ऐसे में मध्य अप्रैल-मई में अवकाश प्रासंगिक नहीं होगा।
शिक्षा विभाग के अनुसार शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रारंभिक विद्यालयों में कम से कम 220 दिनों का अध्यापन अनिवार्य है। निदेशक ने बताया कि नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी घोषित करने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। अतः इन पर भी राज्य सरकार द्वारा तय अवकाश लागू होंगे। अवकाश राज्य के सभी राजकीय, राजकीयकृत, अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त विद्यालय, मकतब आदि में प्रभावी होगा।
अब ग्रीष्मावकाश में भी शिक्षक आएंगे स्कूल
ग्रीष्मावकाश 2024 में सिर्फ विद्यार्थियों के लिए होगा। प्रधानाध्यापक, अध्यापक, शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी सरकारी कैलेंडर के अनुसार विद्यालय आएंगे एवं अन्य शैक्षणिक, प्रशासनिक, कार्यालीय कार्य निष्पादित करेंगे। इस दौरान अभिभावक शिक्षक बैठक कई तिथियों में होंगी। वैसे छात्र जो शिक्षा के अधिकार अधिनियम (संशोधित) 2019, सह-पठित बिहार सरकार की अधिसूचना-287 की परिधि में आते हैं, उनकी विशेष कक्षाएं तथा परीक्षाएं ली जाएंगी। जिला स्तर पर विशेष अवकाश घोषित करने के लिए डीईओ को मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। अब किसी भी सरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक अपने स्तर से अवकाश की घोषणा नहीं कर सकते हैं। यदि किए तो कार्रवाई होगी।
गुरुवार को पूरे दिन होगी गतिविधि
माध्यमिक शिक्षा निदेशक का कहना है कि गुरुवार को विद्यालयों में पूरे दिन गतिविधि होगी। भोजनावकाश तक अध्ययापन होगा। इसके बाद अभिभावकों के साथ बैठक और बाल संसद आयोजित किए जाएंगे।
उर्दू विद्यालयों में शुक्रवार को अवकाश
राज्य के उर्दू प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों, मकतबों में साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को रहेगा। यहां रविवार को पढ़ाई होगी। यदि कोई विद्यालय मुस्लिम बाहुल क्षेत्र में अवस्थित है एवं उर्दू विद्यालय की तरह शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित करना चाहते हों तो संबंधित को जिलाधिकारी से अनुमति प्राप्त कर घोषित कर सकते हैं।
इन त्योहार व जयंती की छुट्टी खत्म: शिवरात्रि, रामनवमी, श्रावण की अंतिम सोमवारी, तीज, जिउतिया, जन्माष्टमी, अनंत चतुर्दशी, भैया दूज, गोवर्धन पूजा, गुरुनानक जयंती व कार्तिक पूर्णिमा।
इन जयंती पर अब होगा अवकाश: गुरु गोविंद सिंह जयंती, रविदास जयंती व भीमराव आंबेडकर जयंती
मैं ही नहीं हर काम करने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति यह सोचता है कि सार्वजनिक अवकाश जिस प्रकार से होते हैं वो नहीं होने चाहिए क्योंकि साल में कई माह रविवार दूसरा शनिवार और फिर त्योहारों पर पड़ने वाले अवकाश पर छुटटी रहती है। ना ही मैं मोहर्रम तथा ईद की बढ़ाई गई छुटिटयों का विरोधी हूं। लेकिन मुख्यमंत्री जी अगर सरकार में रहना है और सत्ता चलानी है तो आजकल जो माहौल और वोटरों की नजर दिखाई दे रही है उससे यही कह सकते हैं कि जो छुटिटयां चल रही हैं उन्हें बंद ना किया जाए। भले ही नई में बढ़ोत्तरी ना हो या फिर एक साथ सभी दलों की बैठक बुलाकर साल में कुछ अवकाश तय करने चाहिए बाकी सब समाप्त। लेकिन जो माहौल चल रहा है उसमें बहुसंख्यकों की छुटटी काटकर अल्पसंख्यकों की में बढ़ावा करना नागरिकों को आसानी से हजम नहीं हो पाएगा। बिहार में विपक्षी दल भाजपा इसी मुददे को लेकर ताल ठोककर सरकार के खिलाफ खड़़ी ना हो जाए। मुख्यमंत्री जी कोई बवाल हो उससे पहले ही अच्छा यही है कि इस निर्णय पर पुन विचार हो क्योंकि इन परिस्थितियों में तो वो आसानी से लागू नहीं हो पाएगा। यह जरूर है कि पहले सनातन धर्म का बिंदु और अब जनमाष्टमी और शिवरात्रि की छुटटी और उर्दू विद्यालयों में शुक्रवार को अवकाश यह ऐसे बिंदु हैं कि विपक्षी दलों की एकता को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और भाजपा को इन पर व्यंग्यात्मक हमले का मौका आसानी से मिल जाएगा।

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