मेरठ 02 मार्च (प्र)। शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट प्रकरण में अब कार्रवाई निर्णायक चरण में पहुंच गई है। 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की ओर से अवैध निर्माणों को हटाने के लिए छह सप्ताह का समय दिए जाने के बाद अब निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है। इसके साथ आवास एवं विकास परिषद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की तैयारी तेज कर दी है।
आवास एवं विकास परिषद प्रशासन ने शास्त्री नगर, जागृति विहार और माधवपुरम योजना क्षेत्र में रिहायशी भूखंडों पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर व्यापक सर्वे कराया था जांच में कुल 729 परिसरों को चिन्हित किया गया, जहां आवासीय मानचित्र के विपरीत दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित पाई गई चिन्हित भवनों पर नोटिस जारी किए गए और कई स्थानों पर लाल रंग से क्रॉस के निशान भी लगाए गए नोटिस की समय सीमा समाप्त होने के बाद परिषद प्रशासन अब आगे की कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, होली के बाद चरणबद्ध तरीके ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा सकता है प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के आदेश का पालन करना अनिवार्य है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर, करीब 270 से अधिक छोटे व्यापारियों ने राज्य सरकार से राहत की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से छोटे स्तर पर कारोबार कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। उन्होंने वैकल्पिक पब्लिक मार्केट विकसित कर पुनर्वास की मांग उठाई है।
सेंट्रल मार्केट बचाने को उठी राष्ट्रव्यापी अपील
शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट को लेकर अब लड़ाई सड़कों से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गई है। संभावित ध्वस्तीकरण की आहट के बीच बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। इसी क्रम में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने की दया प्रार्थना की है। सुदीप जैन ने पत्र में लिखा कि जब 1987 के दंगों के बाद लोगों के सामने जीवन यापन का संकट आया, तब कई परिवारों ने अपने घर के हिस्से में छोटा कारोबार शुरू किया। समय के साथ यह क्षेत्र शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में शामिल हो गया। उन्होंने दावा किया कि बिजली विभाग ने व्यावसायिक कनेक्शन दिए, नगर निगम ने कर वसूला जीएसटी पंजीकरण हुए और कई संपत्तियों की रजिस्ट्री व्यावसायिक रूप में हुई। उनके अनुसार यह विकास प्रशासन और संबंधित विभागों की जानकारी में हुआ। उन्होंने कहा कि यदि कठोर कार्रवाई होती है तो लगभग एक लाख लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित होंगे। इससे बेधरता, बच्चों की शिक्षा बाधित होना, व्यापारियों पर कर्ज का बोझर, स्वास्थ्य और मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सुदीप जैन ने सोशल मीडिया पर पत्र का प्रारूप साझा कर देशभर के व्यापारिक, सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों से भी राष्ट्रपति को दया प्रार्थना भेजने की अपील की है।
मार्च के दूसरे सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है सुनवाई
सेंट्रल मार्केट प्रकरण में 27 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित थी। हालांकि मामला सूची में नया जुड़ने के कारण उस दिन की सुनवाई नहीं हो सकी और तारीख आगे बढ़ गई। अब इस प्रकरण की सुनवाई मार्च के दूसरे सप्ताह में होने की संभावना है। व्यापारिय और स्थानीय लोगों की नजर अब अगली सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि कोर्ट के रुख से आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल संबंधित पक्ष अगली तारीख का इंतजार कर रहे हैं।
