Thursday, May 30

आम जन को जानने का पूर्ण अधिकार है कहां से कितना मिल रहा है राजनीतिक दलों को चंदा

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष आज राजनीतिक चंदों चुनावी बॉंड के विषयों को लेकर सुनवाई शुरू हुई। न्यायाधीश क्या फैसला लेते हैं यह तो अभी नहीं कहा जा सकता लेकिन यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि जो भी उनका निर्णय होगा वो सभी को मान्य होगा। अब भी मैं न्यायालय में विचाराधीन इस विषय पर कोई विशेष टिप्प्णी तो नहीं करना चाहता लेकिन कांग्रेस नेता जया ठाकुर व मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी की याचिकाओं में जो बिंदु इस विषय में उठाया गया है। उसके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के कथन चुनावी बॉड योजना की वैधता के बारे में व्यक्त किए गए विचारों से पूर्ण सहमति रखते हुए लोकतंत्र में अपनी बात कहने के प्राप्त अधिकार को ध्यान में रखते हुए यह जरूर कहना चाहता हूं कि अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी का यह कथन कि राजनीतिक दलों को चुनावी बॉड योजना के तहत मिलने वाले चंदे के स्त्रोत के बारे में नागरिकों को जानने का अधिकार नहीं है को लोकतंत्र में ठीक नहीं कहा जा सकता है।
मैं कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति नहीं हूं और ना ही संविधान ज्ञाता लेकिन जितना समाचार पत्रों में शब्द मिलाकर पढ़ने और सुनने को मिलता है उसके हिसाब से देश में सभी के अधिकार एक समान हैं। कानून में भी सभी को बराबर की महत्ता दी गई है ऐसे में जब सरकार विभिन्न नियमों व कानूनों के नाम पर आम नागरिक की आय स्त्रोत खर्चो और बचत के बारे में जानने की कोशिश की जा रही है तो ऐसे में आम जन को राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदों के बारे में जानने का अधिकार क्यों नहीं है। मुझे लगता है कि अगर अटॉनी जनरल की बात सही है तो सरकार को इस नियम में बदलाव करना चाहिए। क्योंकि यह चंदा उन कुछ बड़े लोगांे से लिया जाता है जिनके बारे में कहा जाता है कि यह कालेधन के संबंध मामलों में किसी ना किसी रूप में लिप्त होते हैं और अपने बचाव के लिए यह चंदा ज्यादातर मामलों में दिया जाता है। सही क्या है गलत क्या है यह तो समीक्षा का विषय है और न्यायालय इस पर निर्णय लेगा। लेकिन इस बात को सही नहीं माना जा सकता जो आर रमणी कह रहे हैं। मेरा मानना है कि देश में भ्रष्टाचार जड़ मूल से नष्ट करने के लिए प्रयासरत देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को इस विषय में हस्तक्षेप कर मतदाताओं को यह अधिकार दिलाना चाहिए क्योंकि जब वो अपना वोट देकर सरकार बनाते हैं तो उन्हें यह जानने का भी अधिकार है कि उनके प्रतिनिधि क्या क्या नियम बना रहे हैं और क्या निर्णय ले रहे हैं। कितना पैसा कहां से आता है और कहां खर्च होता है।

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