Thursday, June 13

सीएम से की निगम के निर्माण लिपिक प्रदीप जोशी की शिकायत

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मेरठ 18 नवंबर (प्र)। प्रीत विहार नौचंदी ग्राउंड निवासी सर्वेश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर नगर निगम के निर्माण विभाग में कार्यरत प्रधान लिपिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सर्वेश अग्रवाल का आरोप है कि सर्वेश कुमार की एक फर्म नगर निगम के निर्माण विभाग में पिछले 30 वर्षों से अधिक समय ए क्लास में पंजीकृत है। जिसमें नवंबर माह 2022 से लिपिक प्रदीप जोशी, नगरायुक्त डा. अमित पाल शर्मा, निर्माण विभाग में कार्यरत रहे तत्कालीन अधिशासी अभियंता विकास कुरील तीनों के द्वारा मिलकर प्रताडित किया जा रहा है। जिसमें उसका गत वर्षों में किए गए निर्माण का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिसमें उसके आठ लाख के भुगतान से दोबारा से करीब सवा लाख रुपये की कटौती भी कर ली गई।

इसमें सर्वेश कुमार का आरोप है कि उसके साथ निगम के अधिकारियों द्वारा अभद्रता भी की गई। जिसमें वह करीब एक वर्ष से अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, उसकी गलत तरीके से काटी गई धनराशि वापस लौटाई जाए। साथ ही दोषियों पर कार्रवाई किए जाने की मांग भेजे गए शिकायती पत्र में की गई है। सर्वेश अग्रवाल का आरोप है कि नगर निगम निर्माण विभाग में वर्तमान में प्रदीप जोशी बड़े बाबू के पद पर कार्यरत है। जोकि एक मृतक आश्रित के कोटे के अन्तंगत वर्ष 2001 मे चतुर्थ श्रेणी चपरासी कैटेगरी पर लगा था जिसमें विभाग में धांधलीबाजी कर उसने अपना बाबू के पद पर 2008 से 2010 के बीच ट्रांसफर करा लिया। आरोप लगाया कि प्रदीप बाबू से अन्य कई लिपिक सीनियर हैं। उसके बाद भी बाबू प्रदीप जोशी को बड़े बाबू का चार्ज दिया गया है, जोकि नियम विरुद्ध है, जोकि सहायता शुल्क देकर दिया गया है। जिसका दंड ठेकेदारों पर सुविधा शुल्क वसूल कर प्रदीप जोशी द्वारा किया जा रहा है। जिसमें नियम के तहत उनका थर्ड ग्रेड पर ट्रांसफर कर दिया गया यह समझ से परे है कि बड़े बाबू बनने के लिए नियम यह है नियमों को नजरअंदाज करते हुए फोर्थ क्लास कर्मचारी का चयन बड़े बाबू के पद पर कर दिया। दूसरी बड़ी बात यह है प्रदीप जोशी पिछले 10 वर्षों से निर्माण विभाग में ठहरे हुए हैं।

प्रदीप जोशी पूर्व में भी कई मामलों में विवादित रहे हैं। जबकि शासन का आदेश है 3 वर्ष से अधिक कोई भी व्यक्ति अपने पटल पर नहीं बना रह सकेगा, लेकिन हर वर्ष सुविधा शुल्क देकर यह अपना पटल बदलने से रुकवा लेता है। शासनादेश की अवेहलना माना जाना चाहिए। मामाले में जांच के घेरे में आ चुके हैं, परंतु विभागीय स्तर पर मिलीभगत से उन्हें क्लीन चिट दे दी जाती है। पूर्व में भी आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इस मामले में मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उच्च स्तरीय जांच कराई जाए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। संबंधित बाबू प्रदीप जोशी के खिलाफ जांच बिठाई जाए इतने समय के लिए संबंधित बाबू को सस्पेंड किया जाए व शिकायतकर्ता को ताकि न्याय मिल सके। इस मामले में संबंधित लिपिक प्रदीप जोशी पर लगे आरोपों पर उनका पक्ष जानने को मोबाइल पर संपर्क किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

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