मेरठ 03 फरवरी (प्र)। सनातन परंपरा में होली केवल रंगों का पर्व नहीं बल्कि फाल्गुन मास की पूर्णिमा मनाया जाने वाला पर्व धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस पर्व पर मुख्य रूप से दो प्राचीन मंदिरों बुढ़ाना गेट स्थित कंठी माता मंदिर और भूमिया का पुल स्थित भूमिया माता मंदिर में होलिका दहन से पूर्व ही पूजा- अर्चना माँ को गुलाल, गुड़ की ढेली अर्पित कर विशेष अनुष्ठानों का क्रम शुरू हो जाता है श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
इन मंदिरों में सुबह से ही मंत्रोच्चार, हवन और धार्मिक कार्यक्रमों का वातावरण भक्तिमय बना देता है। होली के अवसर यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। इस दौरान माता को गुलाल, श्रृंगार सामग्री और चादर अर्पित किया जाता है। भक्तजन अपनी मनोकामनाओं के अनुसार भेंट चढ़ाते हैं। अविवाहित लड़कियां माता को पुष्पमाला अर्पित कर उत्तम वर की कामना करती है। जबकि विवाहित महिलाएं गुड़ की भेली चढ़ाकर परिवार की सुख- समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली का आशीर्वाद मांगती हैं।
भूमिया माता मंदिर में 40 दिन के दीपक से पूरी होती है मुराद
भूमिया पुल क्षेत्र स्थित भूमिया माता मंदिर को क्षेत्र की प्राचीन और चमत्कारी आस्था का केंद्र माना जाता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार यहां विराजमान भूमिया माता की प्रतिमा स्वयंभू है। भूमिया माता को ‘भूमि खेड़ा’ की देवी और पूरे क्षेत्र की संरक्षिका माना जाता है। परंपरा के अनुसार जब किसी की गाय पहली बार दूध देती है तो उसका पहला दूध माता को अर्पित किया जाता है। इस मंदिर का संबंध पांडव काल से जोड़ा जाता है। लोक मान्यताओं में वर्णित है यहां पांडवो ने पूजा की थी। बाद में वीर योद्धा आल्हा और उदल ने भी मां की आराधना की। लोककथाओं में मंदोदरी के यहां पूजा करने का उल्लेख भी मिलता है। हर वर्ष सितंबर में पड़ने वाले नवरात्रों के दौरान माता की भव्य सवारी निकाली जाती है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
बहनों की जुड़ी है आस्था
दीपांशी, शेफाली और दीक्षा पिछले 10- 12 वर्षों से माता के दरबार में आ रही हैं। बीते चार पांच सालों से लगातार दीप प्रज्वलित कर पूजा कर रही हैं और जो भी मनोकामना मांगी वह पूर्ण हुई। तीनों बहनों का विश्वास है सच्चे मन और नियमित आराधना से माता अवश्य कृपा करती हैं।
स्नेहा पिछले 10-15 वर्षों से यहां दर्शन के लिए आ रही हैं। माता की कृपा से उनके घर की आर्थिक और पारिवारिक स्थिति में सुधार हुआ है।
लक्ष्मणपुरी निवासी सुनीता ने बताया माता से संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी थी और गुड़ की भेली चढ़ाने का संकल्प लिया था। 11 वर्षों बाद संतान सुख प्राप्त हुआ और उनकी बोली हुई भेली की मन्नत भी पूरी हुई। वे इसे भूमिया माता की असीम कृपा मानती हैं।
