Tuesday, May 28

रालोद के राजनीतिक प्रभाव को कम करके ना आंकें नेता, वो प्रदेश में कई उम्मीदवारों को हराने और जिताने में सक्षम है

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पांच राज्यों के हुए चुनाव में से तीन में भारतीय जनता पार्टी के पूर्ण बहुमत से जीत जाने और एक में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बावजूद सपा और रालोद गठबंधन की स्थिति और मजबूत होती नजर आ रही हैं। क्योंकि बीते दिनों रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक के बाद कहा कि उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन के साथ है। क्योंकि गठबंधन में अखिलेश यादव की भूमिका है इसीलिए कांग्रेस को बड़ा दिल दिखाने की जरूरत है। जो क्षेत्रीय दल जहां मजबूत है वहां दूसरे उसके साथ सहयोग करें। सीटों को लेकर बंटवारे के संदर्भ में कुछ भी ना बोलते हुए उन्होंने कहा कि रालोद की गठबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां जयंत चौधरी ने कहा कि सात जनवरी को मेरठ में युवा संसद आयोजित होगी जिसमें युवाओं को बेहतर शिक्षा बेरोजगारी के मुददे पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि गन्ने के रस से एथनॉल उत्पादन पर रोक लगाना किसानों पर मार है। सरकार किसानों को 14 दिन में फसल का मूल्य भुगतान करे। दूसरी तरफ अन्य दलों की भांति रालोद भी लोकसभा चुनाव में अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों को तलाशने के साथ ही इस संभावना पर विचार कर रही है कि कहां कहां वो अपने सहयोगी दलों को लाभ पहुंचा सकती है। बताते चलें कि किसान और मजदूरों के नेता पूर्व पीएम चौधरी चरण चरण सिंह साहब के जन्मदिन 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह संदेश रथयात्रा जो सहारनपुर से शुरू हुई वो दिल्ली पहुंचेगी जहां 11 सीटों को मथने और स्थिति का आंकलन करने का काम किया जाएगा। बताते चलें कि यह रथयात्रा सहारनपुर मेरठ मुरादाबाद मंडल के 55 विधानसभा और 11 लोकसभा क्षेत्रों से होकर दिल्ली पहुंचेगी और किसान घाट पर आगे की रणनीति पर होगी चर्चा। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी आदि इस संदेश यात्रा से निरंतर जुड़े हैं। अभी तक इन चुनावों के बाद रालोद का जो मत सामने आया है उससे यह लगता है कि 2024 का लोकसभा चुनाव इंडिया गठबंधन कितनी मजबूती से लड़ेगा यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन रालोद सपा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेगा ओर इसमें ही इन दो दलों के नेताओं का राजनीतिक लाभ भी छिपा है। कुछ लोग यह कहते नहीं थकते कि शामली से चलकर बागपत में समाप्त हो जाता है रालोद मगर वह यह भूल जाते हैं कि स्व. चरण सिंह के समय में उप्र के हर विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र में उम्मीदवारों को रालोद प्रभावित करता था और काफी बड़ी तादात में उसके लोकसभा सदस्य भी थे। एक समय चौधरी अजित सिंह भी अपने कई सांसद जिताने में सफल रहे थे। इसलिए जो यह सोचते हैं कि रालोद कुछ जिलों की पार्टी है यह उसकी भूल है। हां उसके उम्मीदवार अभी कम ही स्थानों पर जीतते हैं लेकिन इतने वोट उम्मीदवारों को मिलते हैं कि कई जगह जीते उम्मीदवारों को हराने में सफल हो सकते है। यहीं आंकड़े सपा और रालोद को अच्छी स्थिति में ला सकते हैं।

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