Friday, August 29

कुंडली छोड़ो, डीएनए मिलान कर रिश्ता जोड़ों

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लखनऊ 21 अगस्त। वैसे तो य फारेंसिक विज्ञान की विशिष्टताओं की बदौलत अपराधों की रोकथाम और अपराधियों की धरपकड़ पर केंद्रित थी लेकिन आयोजन के मंच से विशेषज्ञों ने जीवनसाथी के चयन में भी इस विधा की खूबियां गिनाने के साथ इसे अपनाने की हिमायत की। उनका कहना था कि हमारे पूर्वजों द्वारा विवाह के लिए शुरू की गई कुंडली मिलान की प्रथा यदि विज्ञान पर आधारित थी। कुंडली मिलान में गुण, नाड़ी व गोत्र का मिलान कर शादी का निर्णय लिया जाता था। वहीं, डीएनए मिलान के मूल में भी आनुवंशिकी का आधुनिक विज्ञान है।

फारेंसिक विज्ञान संस्थान में साइबर युद्ध के आयाम विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय समिट के तीसरे और अंतिम दिन फारेंसिक विज्ञानियों ने कहा कि डीएनए मिलान के आधार पर विवाह होने पर शादी के बाद होने वाली तमाम समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। डीएनए मिलान करके युवक व युवती की पीढ़ियों की जानकारी हासिल कर रिश्ता तय किया जा सकता है। युवक व युवती में शारीरिक तौर पर क्या कमियां हैं? अनुवांशिक आधार पर उनका व्यवहार कैसा है? भविष्य में उन्हें क्या बीमारियां हो सकती हैं? उन्हें बच्चे पैदा होने में दिक्कत होगी या नहीं? डीएनए मिलान के जरिये इस प्रकार की तमाम जानकारियां हासिल की जा सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार डीएनए के अध्ययन से यह भी पता किया जा सकता है कि किसी व्यक्ति को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। 30 प्रतिशत भारतीय लैक्टोज पचा नहीं पाते हैं, फिर भी दूध पीते हैं। डीएनए जांच में इस प्रकार की कई जानकारियां मिल जाती हैं जिनसे आप बीमारियों से भी बच सकते हैं।

समिट में नोएडा से आए डीएनए विशेषज्ञ आशीष दुबे ने कहा कि 22 वर्ष पहले अमेरिका ने तीन बिलियन अमेरिकी डालर खर्च कर ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट पर पहली बार काम किया था। अब यह सुविधा 100 डालर (लगभग 8700 रुपये) में उपलब्ध है। जीनियोलाजी टेस्ट से 100 पीढ़ियों के बारे में जानकारी हासिल कर हम खुद को तमाम बीमारियों से बचा सकते हैं।

केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआइ) के वैज्ञानिक डा. राजेंद्र सिंह ने कहा कि डीएनए व आरएनए जांच से आसानी से अपराधियों की उम्र का पता लगा सकते हैं। कहा कि फारेंसिक विज्ञान के नवाचार को लेकर पुलिस के साथ न्यायपालिका को भी जागरूक करने की जरूरत है।

डीएनए जांच से मिला था 1857 में मारे गए 287 सैनिकों को न्याय
वैज्ञानिक डा. नीरज राय ने बताया कि वर्ष 2021 में 287 सैंपल जांच के लिए आए। कार्बन डेटिंग के बाद पता चला कि ये सैंपल वर्ष 1857 के हैं। डीएनए जांच के बाद इन नमूनों के उत्तर प्रदेश और बंगाल के लोगों के होने की पुष्टि हुई। अमेरिका के एक व्यक्ति से भी डीएनए मैच हुआ। वह व्यक्ति छह पीढ़ी पहले उत्तर प्रदेश से अमेरिका गया था। आगे की जांच में पता चला कि उक्त सैंपल वर्ष 1857 में मारे गए भारतीय सैनिकों के थे। फिर उन्हें न्याय मिल सका।

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