Friday, April 19

मोदी जी! अब भी भाजपा के जिताऊ उम्मीदवार साबित हो सकते हैं राजेंद्र अग्रवाल मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट भाजपा उम्मीदवार कमजोर रहा तो बेचैन मुस्लिम मतदाता कर सकते हैं लोटा नमक

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मोदी जी! अब भी भाजपा के जिताऊ उम्मीदवार साबित हो सकते हैं राजेंद्र अग्रवाल
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट भाजपा उम्मीदवार कमजोर रहा तो बेचैन मुस्लिम मतदाता कर सकते हैं लोटा नमक
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर अभी उम्मीदवार की घोषणा नहीं हो पाई। बडे नेता यहां किसे उतारे अभी इस पर चर्चा करने में लगे है। जानकारों का कहना है कि चौथी बार भी राजेंद्र अग्रवाल ही चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। मगर खबरों से पता चलता है कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नडडा, अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में बीते दिवस दिल्ली और लखनउ में चर्चाएं हुई जिसमें केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह, राज्यसभा सदस्य अनिल अग्रवाल, कैप्टन विकास गुप्ता, कैंट विधायक अमित अग्रवाल और अपने आप को नामचीन कवि कहलाना पसंद करने वाले कुमार विश्वास और रामायण धारावाहिक में राम की भूमिका निभाने वाले अरूण गोविल के नाम पर भी चर्चा होना बताया जा रहा है। भले ही पहले मेरठ मवाना और अब मेरठ हापुड़ सीट पर पांच बार से जानकारों के अनुसार भाजपा का कब्जा है और इसे अब वैश्य समाज बाहुल्य सीट कहा जाने लगा है। जबकि इस सीट पर पूर्व में जनरल शाहनवाज मोहसिना किदवई हरीश पाल, ठाकुर अमरपाल सिंह, महराज सिंह भारती आदि भी चुनाव जीते हैं। इस हिसाब से यह गुर्जर ठाकुर मुस्लिम और वैश्य सीट कही जा सकती है। सपा ने अभी तक यहां से अपना उम्मीदवार के रूप में भानुप्रताप और बसपा ने देवव्रत त्यागी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। यह उम्मीदवार बहुसंख्यक हिंदू है। इसलिए मुस्लिमों की इस सीट पर बड़ी भागीदारी होने के चलते यहां से कोई मुस्लिम उम्मीदवार उतार दिया गया तो उस परिस्थिति में भाजपा तभी यह सीट बचा सकती है जब उम्मीदवार जाना पहचाना हो और सबके लिए उपलब्ध हो। यह खूबियां सिर्फ राजेंद्र अग्रवाल में ही नजर आती है इसलिए मुझे लगता है कि शिवसेना भी उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर चुकी है इसको देखते हुए भाजपा हाईकमान को उम्मीदवार बनाने में सोच विचारकर निर्णय लेना चाहिए। कांग्रेस काल  के दौरान यहां से सोशलस्टि  पार्टी के उम्मीदवार भले ही सांसद और विधायक बन चुके हैं। पूर्व में मेयर के चुनाव में भले ही भाजपा प्रत्याशी हरिकांत अहलूवालिया जीते हो मगर दूसरे नंबर पर एआईएमआईएम के उम्मीदवार रहा था जो इस बात का प्रतीक है कि भले ही बाहुल्य वाले इस क्षेत्र में अगर भाजपा का उम्मीदवार जरा सा भी कमजोर या अनजान हुआ तो    असददुदुन औवेसी की पतंग ने जो जलवा मेयर के चुनाव में एक लाख 28 हजार 543  वोट प्राप्त कर उनके उम्मीदवार अनस ने उपस्थिति दर्ज कराई थी इस बार ज्यादा उम्मीदवार हिंदू होने के चलते वो इससे आगे भी बढ़ सकते हैं। क्योंकि पिछले कुल सालों में सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के हित में काफी निर्णय लिए गए हो व संघ भाजपा के नेता इस वर्ग को अपने पाले में लाने में लगे हो मगर मुस्लिम मतदाताओं का मन बैचेन है। क्योंकि कहीं ना कहीं इन्हें लगता है कि जो एक दशक से चल रहा है वो ही चलता रहा तो उनकी स्थिति काफी कमजोर हो सकती है। ऐसे में किसी मुस्लिम मतदाता के प्रति लोटे में नमक कर इस समाज के वोट एकजुट हो गए और भाजपा का उम्मीदवार कमजोर रहा तो जो आम आदमी तीसरी बार मोदी को पीएम बनने का सपना देख रहा है उसका मन भी टूट सकता है। मोदी जी! अब भी भाजपा के जिताऊ उम्मीदवार साबित हो सकते हैं राजेंद्र अग्रवाल।
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