Wednesday, May 22

अब रक्त जांच से लग जाएगा मनोरोग का पता

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नई दिल्ली 31 अक्टूबर। बाइपोलर डिसऑर्डर (द्विध्रुवी विकार) का साधारण रक्त परीक्षण से भी अब पता लगाया जा सकता है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मनोरोग की पहचान के लिए आसान चिकित्सा जांच की खोज की है। शोधकर्ताओं का यह भी दावा है कि डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन के साथ यह तकनीक और भी ज्यादा कारगर है।
मेडिकल जर्नल जामा में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने ऐसे बायोमार्कर की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल कर अवसाद और बायपोलर बीमारी की पुष्टि में किया जा सकता है। इस बायोमार्कर का इस्तेमाल एक रक्त जांच से कर सकते हैं।

इन बीमारियों के लक्षण काफी देरी से पता चलते हैं, जिनकी वजह से इलाज में भी देरी हो सकती है। हालांकि, अभी इस तकनीक को आने में थोड़ा वक्त लग सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मौजूदा मनोरोग निदान के लिए एक प्रभावी पूरक हो सकता है और उन्हें मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों की जैविक उत्पत्ति को समझने में मदद कर सकता है। कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रो. जैकब टोमासिक ने कहा, यह अत्यधिक प्रभावी तरीका है और एक साधारण रक्त परीक्षण के साथ बीमारी की पहचान करने की क्षमता रखता है।

दुनिया भर में करीब एक फीसदी आबादी बाइपोलर बीमारी से ग्रस्त है। दुनिया भर में करीब आठ करोड़ से ज्यादा लोग इससे पीड़ित हैं जिनमें से करीब 40 फीसदी रोगियों में अक्सर इस बीमारी को अवसाद समझा जाता है जबकि चिकित्सा तौर पर यह गलत पुष्टि है। दोनों के लक्षण लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं जबकि दवाएं अलग अलग होती हैं।

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