मेरठ 13 अप्रैल (प्र)। आवास विकास परिषद के बाद अब मेडा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर कालोनियों में बने आवासीय भूखंड व भवनों पर कार्मिशियल गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। मेडा में बीस हजार से ज्यादा ऐसी शिकायत है जिसमें लोगों ने आवासीय भूखंडों पर अपने कांप्लेक्स व दुकानें बना ली है। कई बार नोटिस देने के बाद उन्होंने अपनी दुकानों को नहीं तोड़ा। मेडा ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए ऐसे सभी आवंटियों को दुबारा से नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
मेड़ा के सचिव आनंद कुमार का कहना है कि आवासीय भवनों पर बनी दुकानों को चिंहित किया जा रहा है। इसके बाद उन्हें नोटिस देकर ध्वस्त किया जाएगा। 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए शास्त्री नगर योजना क्षेत्र की 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक यानी इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह में हुए निर्माण को दो महीने के भीतर तोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, यह मामला केवल आवास विकास परिषद तक सीमित नहीं है। यह मामला प्रदेश के सभी प्राधिकरण व पूरे देश के लिए चेतावनी है।
प्रशासन ने समय रहते सही कदम उठाए होते, तो इतनी बड़ी समस्या पैदा नहीं होती। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा, कानून का शासन किसी भी हाल में जनभावनाओं या दबाव के आगे नहीं झुक सकता। पीठ ने इस मामले में छह अप्रैल को सुनवाई करते हुए 859 संपत्तियों में से सेंट्रल मार्केट की 44 आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर पूर्ण रोक लगाने और इन संपत्तियों को सील करने की 9 अप्रैल तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी।
यूपी आवास विकास परिषद ने 8 अप्रैल सीलिंग की कार्रवाई शुरू की और बृहस्पतिवार को कोर्ट को बताया कि ये 44 संपत्तियां सील कर दी गई हैं। हालांकि सीलिंग के दौरान अफसरों को कई बार व्यापारियों के कड़े प्रतिरोध का सामना भी करना पड़ा। इसी आदेश को देखते हुए मेरठ विकास प्राधिकरण ने भी अपनी आवासीय कालोनियों पर आवासीय भूखंड व भवनों पर बनी दुकानों व कांप्लेक्स को चिंहित करना शुरू कर दिया है।
यह है मेडा की आवासीय कालोनी
गंगा नगर, लोहिया नगर, पांडव नगर, शताब्दी नगर, श्रद्धापुरी, सरायकाजी, पल्लवपुरम
बीस हजार से ज्यादा है मेडा के पास शिकायतें
मेडा के पास अपनी 7 से आवासीय कालोनियों के आवासीय भूखंडों व प्लाटों में कार्मिशियल गतिविधि शुरू करने की करीब बीस हजार से ज्यादा शिकायतें पहुंची हुई है। कई शिकायतों पर मेडा ने आवंटियों को नोटिस भी दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दुबारा से नोटिस दिया जाएगा। अगर नोटिस के बाद दुकानें बंद नहीं तो कोर्ट का हवाला देते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
