Friday, March 1

कुत्तों के ब्रीडिंग सेंटरों का आनलाइन संचालन, निगम बेखबर

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मेरठ 19 दिसंबर (प्र)। नगर निगम क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कुत्तों के ब्रीडिंग सेंटरों का आनलाइन संचालन किया जा रहा है। यहां खूंखार नस्ल के कुत्तों की उपलब्धता हर वक्त होती है। 25 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक के विदेशी नस्ल के कुत्तों की बिक्री की जा रही है। इंटरनेट मीडिया पर इनको सर्च किया जा सकता है। दूसरी ओर, ये सेंटर नगर निगम को नजर नहीं आ रहे हैं। बिना पंजीयन चल रहे अवैध ब्रीडिंग सेंटरों से निगम को सलाना 20 लाख की चोट पहुंच रही है।

निगम में एक भी डाग क्लीनिक व ब्रीडिंग सेंटर पंजीकृत नहीं गत वर्ष अक्टूबर माह में नगर निगम बोर्ड बैठक में ब्रीडिंग सेंटर, डाग क्लोनिक के लिए पंजीयन अनिवार्य किया था। बोर्ड बैठक में पंजीयन शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव पास किया गया था। इस पर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। एक भी ब्रीडिंग सेंटर, डाग क्लीनिक निगम में पंजीकृत नहीं है। अवैध तरीके से इनका संचालन किया जा रहा है। इससे न केवल निगम को सालाना लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है बल्कि खूंखार नस्ल के कुत्तों की बढ़ती संख्या पर लगाम नहीं लग पा रही है। स्थिति ये है कि ब्रीडिंग सेंटर के संचालक बकायदा इंटरनेट मीडिया पर प्रचार-प्रसार अपने कारोबार को बढ़ा रहे हैं।

कई नस्ल के कुत्ते जैसे पग, लेब्राडोर, हस्की, पामेरियन, अमेरिकन बुली, पिटबुल, राटविलर, डोगो अर्जेंटीनो, जर्मन शेफर्ड, डाबरमैन आदि का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। कोई वार्ड ऐसा नहीं है, जहां पर विदेशी नस्ल के कुत्तों के ब्रीडर मौजूद ना हों। ये बात दीगर है कि ये ब्रीडर नगर निगम की पहुंच से बाहर हैं। बागपत रोड, प्रभात नगर में सर्वोदय कालोनी के पास, माधवपुरम में ईरा गार्डेन एस्टेट के आसपास, रिठानी, लालकुर्ती, मोदीपुरम, ईशापुरम, गंगानगर, कंकरखेड़ा क्षेत्र में डाग ब्रीडर और डाग क्लीनिक हैं।

तीन हजार से 15 हजार रुपये तक है पंजीयन शुल्क
नगर निगम बोर्ड ने डाग क्लीनिक का वार्षिक पंजीयन शुल्क 5,000 रुपये, डाग क्लीनिक मय हास्पिटल का वार्षिक पंजीयन शुल्क 10 हजार रुपये, पेट शाप का पंजीयन शुल्क 3,000 रुपये, डाग ब्रीडर या ब्रीडिंग सेंटर 15 हजार रुपये और डाग प्रदर्शनी के लिए 10 हजार रुपये पंजीयन शुल्क निर्धारित किया है। अगर शहर में कम से कम 150 से अधिक स्थानों पर अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं। अगर सभी पंजीकृत कराए जाएं तो लगभग 20 लाख रुपये सलाना राजस्व निगम में आएगा। लेकिन निगम इसके लिए भी गंभीर नहीं दिखता है।

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