Sunday, April 14

पीएम साहब कुछ लोगों का नहीं सभी का रखना होगा ध्यान, भय बिन प्रीत व भूखे पेट भजन ना होए गोपाला को आत्मसात करना होगा

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अगर ध्यान से देखें तो भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में लघु और भाषाई समाचार पत्रों के संचालकों में से कुछ को छो्रड़कर बाकी के लिए सरकार द्वारा कुछ नहीं किया गया। इतना ही नहीं पूर्व सरकार नियमित रूप से जो कर रही थी वर्तमान मेें वो व्यवस्था भी खत्म कर दी गई। अगर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहलाने वाले मीडिया को छोड़ दें तो जितना नजर आता है ज्यादातर सबके लिए ही कुछ ना कुछ किए जाने की घोषणा सरकार करती नजर आ रही है। वो बात और है कि पात्र व्यक्तियों को लाभ किस योजना का कितना मिल रहा है।
माननीय प्रधानमंत्री जी का कहना है कि देश अब गुलामी की मानसिकता से मुक्त हो रहा है। गांव की दो करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने का संकल्प है। किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं। जब जनप्रतिनिधि और सरकार घोषणाएं कर रही हैं तो ऐसा नहीं कि सरकार कुछ ना कर रही हो। बीते समय में केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण बिल पास कराया और सरकारी नौकरियों में बढ़ावा देने की बात की जा रही है लेकिन सवाल यह उठता है कि अघोषित रूप से देश की लगभग 150 करोड़ आबादी का आधा महिला शक्ति लगभग 75 करोड़ में से तीन करोड़ को लखपति बनाने से क्या होने वाला है। इसी प्रकार जितना किसानों और मजदूरों व नौकरशाहों को सरकार दे रही है उतने ही उनमें असंतोष और उनके लिए कुछ ना किए जाने के आरोप रोज ही लगाए जा रहे हैं।
पीएम साहब आप जब कुछ कहते हैं तो यह गारंटी होती है कि सौ नहीं तो 90 प्रतिशत उस क्षेत्र में काम तो होगा ही। तो फिर आखिर यह असंतोष कम होने की बजाय बढ़ता ही क्यों जा रहा है। महिलाएं आरक्षण लागू ना होने को लेकर मुखर हैं। किसान नेता आरोप लगा रहे हैं कि उनके लिए कुछ हो नहीं रहा। मजदूर पहले की तरह ही परेशान है। वो बात और है कि कुछ राहत मिली हो। अघोषित क्षेत्र के कामगार व प्राइवेट कपंनियों के कर्मचारी कोई भी यह कहने को तैयार नहीं है कि सरकार कुछ कर रही है। जब भी चुनाव होंगे आपके नाम पर वोट देने में यह वर्ग पीछे नहीं रहते क्योंकि इनमें से ज्यादातर का मानना है कि पीएम कम से कम सोचते तो हैं और जमीन से जुड़े व्यक्ति की समस्याएं भी जानते हैं और उनका दुख दर्द भी समझते हैं। इसलिए आपके नाम पर वोट मिलते हैं और सरकार बनती है।
लेकिन यह सर्वविदित है कि भूखे पेट भजन ना हो पाए गोपाला भय बिन प्रीत ना हो पाए गोपाला को भी ध्यान में रखकर सरकार को कुछ ऐसा करना होगा कि कुछ लोग नहीं समूह में हर वर्ग के नागरिकों को लाभ पहुंचे। और जो जनहित की योजनाएं महिला किसान नौकरशाहों दिव्यांगांे के लिए सरकार बना रही है उसका लाभ भी पात्रों तक पहुंचे। यह तभी संभव है जब बिचौलियों में भय हो और समझते रहे कि पकड़े गए तो क्या क्या हो सकता है।
प्रधानमंत्री जी देश की जनता को आपसे और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से बड़ी उम्मीदें हैं और वो मानते हैं कि एक दिन उनकी कठिनाईयों का हल पीएम जरूर करेंगे। शायद इसीलिए भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में विजय प्राप्त होने के सपने दिख रहे हैं वो इसी सोच का परिणाम है। आपसे अनुरोध है कि यह सोचने वाले कहीं उम्मीद में ही ना निकल जाएं। ऐसा ना हो इसलिए इनके तनाव मुक्त चेहरे और भय का माहौल दूर कर इनकी अवहेलना जो हर स्तर पर हो रही है उसे दूर किया जाए। क्योंकि विपक्ष भी आप शांत बैठने वााला नहीं है। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वो भी नए मामले खोजकर जनता के बीच लाने में लगा है। इससे थोड़े मतदाता भी इधर उधर हो गए तो चुनाव परिणाम काफी प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए आपसे अनुरोध है कि लघु और भाषाई समाचार पत्रों के लिए भी सोचें क्योंकि सरकारी योजनाएं जनता के सामने इसी वर्ग का मीडिया लेकर पहुंचता है। जिन बड़े बैनर के मीडिया को सरकार विज्ञापन बांट रही है वो नहीं।

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