मेरठ 23 फरवरी (प्र)। प्रदूषण जांच की नई ओटीपी आधारित व्यवस्था में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं को लेकर पीयूसी यूनियन ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। यूनियन ने जिलाधिकारी कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपकर इस व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
यूनियन का कहना है कि सरकार द्वारा पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू की गई यह नई प्रणाली धरातल पर आम जनता और वाहन स्वामियों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रही है।
मुख्य समस्याओं में से एक यह है कि अधिकांश पुराने वाहनों के साथ लिंक मोबाइल नंबर या तो निष्क्रिय हो चुके हैं या बदल गए हैं। इसके कारण ओटीपी प्राप्त नहीं हो पाता और वाहन स्वामियों को प्रदूषण केंद्रों से बिना प्रमाण पत्र के लौटना पड़ता है।
दूसरी समस्या आधार और मोबाइल लिंक में विसंगति से संबंधित है। वाहन पोर्टल पर मोबाइल नंबर अपडेट करने की प्रक्रिया जटिल है, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए स्वयं करना मुश्किल हो रहा है।
तीसरी समस्या प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने पर लगने वाले 10,000 रुपये के भारी चालान का मानसिक दबाव है। तकनीकी खामियों के कारण प्रमाण पत्र न बन पाने और सड़क पर भारी जुर्माना लगने से आम जनता को परेशानी हो रही है।
यूनियन ने विभाग से विनम्र अनुरोध किया है कि जांच केंद्रों को सीमित रूप से ‘मोबाइल नंबर अपडेट’ करने का अधिकार दिया जाए। इसके अतिरिक्त, बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) या आधार-आधारित सत्यापन की वैकल्पिक सुविधा भी शुरू की जानी चाहिए।
पीयूसी यूनियन की जिला अध्यक्ष मनोज पांडे के नेतृत्व में सदस्यों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने यह भी मांग की कि जब तक डेटा पूरी तरह अपडेट नहीं हो जाता, तब तक पुरानी और नई (ओटीपी) दोनों प्रक्रियाओं को कुछ समय के लिए समानांतर रूप से चलने दिया जाए।
