Sunday, April 14

चुनाव आयुक्त का दर्जा कैबिनेट सचिव का करने पर हो पुनर्विचार

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नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर। पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस वाई कुरैशी ने कहा है कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित विधेयक की अनेक सकारात्मक विशेषताएं हैं। हालांकि, उन्होंने चयन समिति की संरचना और निर्वाचन आयोग के सदस्यों के दर्जे को कैबिनेट सचिव के स्तर का करने के प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त की।
अपनी नई किताब ‘इंडियाज एक्सपेरिमेंट विद डेमोक्रेसी: द लाइफ ऑफ ए नेशन थ्रू इट्स इलेक्शन’ पर ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में, कुरैशी ने कहा कि सकारात्मक विशेषताओं में निर्वाचन आयुक्तों के चयन के लिए योग्यता का निर्धारण शामिल है।

जुलाई 2010 से जून 2012 तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के रूप में सेवाएं देने वाले कुरैशी ने कहा, ‘‘आज तक, कोई योग्यता (निर्धारित) नहीं थी, सड़क से किसी को भी उठाकर निर्वाचन आयुक्त बनाया जा सकता था जो अच्छी बात नहीं थी। नए विधेयक में कहा गया है कि केवल सचिव-स्तर के अधिकारियों या उनके समकक्षों को ही तैनात किया जाएगा जो कि अच्छी बात है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक में एक छंटनी समिति का भी प्रावधान प्रस्तावित है और यह भी एक अच्छा विचार है और कई देशों में इस तरह की परंपरा है। इतना जरूर हो सकता है कि संरचना में थोड़ा सुधार किया जा सकता है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम पद से हटाये जाने से संरक्षण की मांग कर रहे हैं जो सीईसी के लिए उपलब्ध है और इसे दोनों निर्वाचन आयुक्तों को भी दिया जाना चाहिए। इस विधेयक में यह प्रस्ताव है, यह महत्वपूर्ण बात है।’’

कुरैशी ने कहा, ‘‘जिस बात पर पुनः विचार करने की आवश्यकता है वह यह है कि इस पद को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के स्तर से घटाकर कैबिनेट सचिव का किया जा रहा है, जो उचित बात नहीं है क्योंकि भारत का निर्वाचन आयोग ‘विश्वगुरु’ बन गया है… दस वर्षों में 108 देशों के आयुक्तों ने हमसे प्रशिक्षण लिया है। दुनिया के आधे देशों में चुनाव आयुक्त के रूप में न्यायाधीश हैं, वे यहां नौकरशाही से निपटने में थोड़ा असहज महसूस करेंगे।’’

सरकार ने अगस्त महीने में राज्यसभा में विपक्षी दलों के हंगामे के बीच एक विधेयक पेश किया था जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों के चयन वाली समिति में भारत के प्रधान न्यायाधीश की जगह किसी कैबिनेट मंत्री को रखने का प्रस्ताव है।

विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति सेवा शर्तें और कार्यकाल) विधेयक, 2023 उच्च सदन में पेश किया था।

विधेयक के अनुसार, भविष्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्तों और निर्वाचन आयुक्तों का चयन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पैनल द्वारा किया जाएगा, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने विधेयक पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए सरकार पर उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के आदेश को कमजोर करने का आरोप लगाया।

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