Friday, August 29

लखनौती का ऐतिहासिक किला कब्जामुक्त

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गंगोह (सहारनपुर) 27 अगस्त। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले ने अपनी पुरानी विरासत को आज भी संजोए हुए है. यहां पर आज भी हजारों साल पुरानी इमारतें मौजूद हैं जो कि खंडहर में तब्दील हो चुकी है. उन्हीं में से एक है भूल-भुलैया के नाम से जाने-जाने वाली लगभग 500 साल पुरानी इमारत जो कि सहारनपुर के कस्बा गंगोह के लखनौती में स्थित है. इसे लखनौती का किला भी कहा जाता है. यह किला मुगल क़ालीन भूल-भुलैया है. सहारनपुर में मौजूद है मुगलकालीन भूल-भुलैया एवं किला, कोर्ट के आदेश पर अब लखनौती में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ऐतिहासिक किले को कब्जे से मुक्त करा लिया।

सोमवार देर शाम उपजिलाधिकारी सुरेंद्र कुमार पुलिस बल और राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन को विरोध की आशंका थी, लेकिन कार्रवाई शांतिपूर्वक संपन्न हुई। कार्रवाई से पूर्व प्रशासन ने संबंधित लोगों को किले को खाली करने के नोटिस जारी कर दिए थे।

उपजिलाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि किले और संबंधित जमीन पर कब्जा लेकर सरकारी स्वामित्व का बोर्ड लगा दिया गया है। विपक्षियों का कुछ सामान किले में रह गया है, जिसे जल्द उठवा दिया जाएगा।

नायब तहसीलदार धर्मेंद्र सिंह, सीओ शशि प्रकाश शर्मा के अलावा राजस्व टीम व भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहे। मंगलवार दोपहर के बाद फिर एसडीएम नायब तहसीलदार धर्मेंद्र सिंह राजस्व टीम और पुलिस बल के साथ किले पर पहुंच गए। देर शाम तक किले और उसके आसपास की जमीन की नापतौल का कार्य जारी था।

यह है मामला
लखनौती में 1.772 हेक्टेयर भूमि में फैले किले को न्यायालय ने सरकारी संपत्ति माना है। लखनौती राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 174 आबादी किला के रूप में दर्ज है। जमींदारा खात्मे से पहले इस भूमि पर एएनडब्ल्यू पाल का नाम दर्ज था। चकबंदी में इस भूमि को आबादी घोषित कर दिया गया था। इस मामले को लेकर फरजंद अली, शाह हसन, मोहम्मद कारिब, मोहम्मद शारिब और मोहम्मद कुमैल ने एसडीएम सदर के 12 जुलाई 2021 के आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी थी।

यमुना नदी किनारे बसा है ये किला
लखनौती का पुराना नाम लक्ष्मणावती भी बताया जाता है. इतिहासकार राजीव उपाध्याय यायावर बताते हैं कि प्राचीन काल से ही यह क्षेत्र यमुना के किनारे होने के कारण बहुत अहम रहा है. पश्चिम दिशा से होने वाले आक्रमण की दृष्टि से सरसावा के बाद इसी क्षेत्र का महत्व बहुत ज्यादा है. 1526 में जब बाबर ने भारत पर आक्रमण किया था तो उसका पहला पड़ाव यमुना पार करने के बाद सरसावा में लगा था और सरसावा से ही इब्राहिम लोदी की सेना को हराने के लिए उसकी सेना दो भागों में से होकर लखनौती के आसपास क्षेत्र से गुजरी थी.

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