Friday, April 19

साढ़े चार माह में ही किशोरी से दुष्कर्म कर हत्या करने वाले को फांसी की सजा

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श्रावस्ती, 18 अक्टूबर। श्रावस्ती जिले में गिलौला थाना क्षेत्र के रामपुरपैड़ा में किशोरी के साथ हुए दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। जिसका शव मिर्चिहा गांव के निकट नहर किनारे झाडियों में छिपाया गया था। साढ़े चार माह में ही मंगलवार को इस मामले में अपर जिला सत्र न्यायाधीश क्राईम अगेंस्ट वूमेन ने आरोपी को फांसी के साथ चार लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाया।
गिलौला थाना क्षेत्र के रामपुर पैड़ा निवासी राममोहन पाठक की पुत्री स्तुति उर्फ शालू (12) का तीन जून 2023 को गांव के ही शील कुमार पाठक ने अपहरण कर लिया था। जिसे सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। वहीं घटना को छिपाने के लिए आरोपी ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दिया। इसके बाद शव को बोरे में रख बहराइच के थाना पयागपुर अंतर्गत मिर्चिहा गांव के पास सरयू नहर के बाई पटरी के किनारे झाडियों में छिपा दिया था।

किशोरी के पिता की तहरीर पर पुलिस ने शील कुमार पाठक पर मामला दर्ज कर न्यायालय पर आरोप पत्र भेजा था। मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश( क्राईम अगेंस्ट वूमेन) करुणा सिंह की अदालत पर किया जा रहा था। इस मामलें में अभियोजन पक्ष की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सत्येंद्र बहादुर सिंह व विशेष लोक अभियोजक (पाक्सो) रोहित गुप्ता कर रहे थे। सुनवाई के दौरान जिनकी ओर से सोलह गवाह प्रस्तुत किए गए। गवाहों के बयान व अभियोजन की दलीलों के बाद एडीजे ने आरोपी शील कुमार को फांसी के साथ चार लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न अदा करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय में जब मामले की सुनवाई की जा रही थी। उस समय आरोपी की मां व उसकी पत्नी ने भी उसके खिलाफ गवाही दी थी। जिसे भी न्यायालय ने गंभीरता से लिया था।

रामपुर पैड़ा निवासी स्तुति उर्फ शालू हत्याकांड में मंगलवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश( क्राईम अगेंस्ट वूमेन) करुणा सिंह ने सजा सुनाने से पूर्व मृतका की माता उमा पाठक व पिता राममोहन पाठक से कोर्ट रूम में बुलाया। जहां उनसे पूछा कि आप कुछ कहना चाहते हैं। इस पर दंपत्ति ने न्याय पर भरोसा जताते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुनाने की मांग किया।
इसके कुछ ही पल बाद अपर जिला सत्र न्यायाधीश( क्राईम अगेंस्ट वूमेन) ने अपने सौ पेज का फैसला सुनाया। जिसमें आरोपी को फांसी की सजा दी गई।

जांच के दौरान अभियुक्त ने स्वीकार किया था कि उसकी पत्नी आठ माह की गर्भवती थी। इस कारण से उसका पत्नी के साथ शारीरिक संबंध स्थापित नहीं हो पा रहा था। मृतका उसके घर आती जाती थी। घटना के पूर्व मैंने इसको कई बार छेड़ा था। इसने विरोध नहीं किया था। इसलिए आज मैंने इसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए घर खाली किया । घटना वाले दिन सुबह 9.00 बजे मेरे पिताजी पैसों के लिए दूसरे गांव गए हुए थे। मैंने अपने पत्नी बच्चों तथा मां को पचदेवरा मंदिर छोड़ आया था । मृतका से जबरदस्ती बलात्कार करने के बाद,मृतका ने सबको बता देने की बात कही। इसलिए उसने उसका मुंह व नाक दबाकर उसकी हत्या कर दी। मृतका ने अपने बचने का बहुत प्रयास किया था।

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